योग का शूटिंग से क्या संबंध है?

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नई दिल्ली: 21 जून को मनाए जानेवाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस । शूटिंग जैसे ख़ास खेलों में योग का बराबर इस्तेमाल किया जा रहा है। शूटिंग से जुड़े खिलाड़ी और कोच को लगता है कि योग के सही इस्तेमाल से इन खेलों में ओलिंपिक पदक हासिल करने में भी बड़ी मदद मिल सकती है।

योग का शूटिंग से क्या संबंध है? एक्सपर्ट्स कहते हैं कि भारत ही नहीं दुनिया भर के कई शूटर अच्छी निशानेबाज़ी के लिए योग का अभ्यास करने लगे हैं। ये शूटर यह भी मानते हैं कि योग से इस खेल के खिलाड़ियों को कहीं ज्यादा फ़ायदा मिल सकता है।

दिल्ली की टॉपगन शूटिंग अकादमी के कुछ होनहार शूटर इन दिनों रियो ओलिंपिक्स और उसके बाद के ओलिंपिक खेलों के लिए निशाना साध रहे हैं। शूटिंग से पहले इस पार्क में योग करना इनका नियम बन गया है। हालांकि इनमें से किसी ने इस बार रियो के लिए क्वालिफ़ाई नहीं किया है, लेकिन जानकार मानते हैं कि इनमें से कई शूटर आने वाले ओलिंपिक और वर्ल्ड कप में अपना जौहर दिखा सकते हैं।

अहम बात ये है कि ये सभी शूटर नियम बनाकर शूटिंग से पहले योग का अभ्यास ज़रूर करते हैं। टॉपगन अकादमी के योग कोच दिलीप कहते हैं कि योग के अभ्यास से खिलाड़ियों को संतुलन बनाने में, फ़ोकस बनाने में, स्वस्थ रहने में और ख़ासकर अहम मौक़ों पर संयम बरतने में काफ़ी मदद मिलती है।

हाल ही में पुणे नेशनल गेम्स में 10 मीटर एयर राइफ़ल का रजत पदक जीतने वाली नियति खन्ना कहती हैं कि योग करने से उनके स्कोर काफ़ी बेहतर हुआ है। वो कहती हैं कि इससे उनका स्कोर कम से कम 20 प्वाइंट्स बेहतर हुआ है।

नियति ने पुणे नेशनल गेम्स में 400 में 391 का स्कोर किया, जबकि उनका स्कोर पहले 360 के क़रीब रहता था। जानकार उनमें कुछ बहुत बड़ा कर दिखाने का भी टैलेंट देखते हैं। नियति कहती हैं कि योग की वजह से उनके और दूसरे शूटरों के स्कोर में बड़ा फ़र्क आया है। शूटिंग एक्सपर्ट्स इस असर की अहमियत समझते हैं।

टॉपगन अकादमी के मालिक और शूटिंग एक्सपर्ट शिमोन शरीफ़ कहते हैं कि अब दुनिया भर के कई शूटर योग की अहमियत समझने लगे हैं। वो कहते हैं कि सांसों पर नियंत्रण के लिए खिलाड़ी पहले भी व्यायाम करते थे, लेकिन योग से अब खिलाड़ियों को निशाना साधने में सीधा फ़ायदा मिलने लगा है।

खिलाड़ी और कोच महसूस करने लगे हैं कि योग के दौरान ख़ासकर प्राणायाम और बॉडी बैलेंस के लिए सिखाए जाने वाले आसनों से उन्हें अपना फ़ोकस बनाने में काफ़ी मदद मिलने लगी है। मसलन ताड़ासन से खिलाड़ियों को संतुलन बनाने में, ध्यान से फ़ोकस बनाने में और प्राणायाम से निशाने के वक्त खुद को स्थिर रखने में मदद मिलती है।

अच्छी निशानेबाज़ी के लिए सांसों पर नियंत्रण बेहद ज़रूरी है। आम लोगों के लिए योग सेहत से जुड़ा मसला हो सकता है, लेकिन अच्छे निशानेबाज़ इसके ज़रिये पोडियम तक पहुंचने का रास्ता ढूंढने लगे हैं। दरअसल शूटिंग में योग किसी भी दूसरे खेल के मुक़ाबले सीधा असर दिखाता है। भारत के कई अंतरराष्ट्रीय शूटर्स इसकी अहमियत तो समझने लगे हैं, लेकिन फ़िलहाल योग भारतीय कैंप का हिस्सा अब तक नहीं बन पाया है।