विश्वनाथन आनंद की 'अद्भुत और अविश्वसनीय' जीत

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नई दिल्ली: विश्व चैम्पियन मैग्नस कार्लसन को हराने के बाद विश्वनाथन आनंद ने शानदार लय बरकरार रखते हुए रियाद में विश्व रैपिड शतरंज चैम्पियनशिप खिताब जीत लिया.आनंद ने दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी कार्लसन को नौवे दौर में हराकर 2013 विश्व चैम्पियनशिप में मिली हार का बदला चुकता कर लिया. उन्होंने 2013 में यह खिताब कार्लसन को गंवाया था जबकि 2003 में उन्होंने फाइनल में ब्लादीमिर क्रामनिक को हराकर खिताब जीता था.वह आखिरी पांच राउंड की शुरूआत के वक्त संयुक्त दूसरे स्थान पर थे जब रूस के ब्लादीमिर फेडोसीव और इयान नेपोम्नियाश्चि के भी 15 में से 10.5 अंक थे. आनंद ने टाइब्रेकर में फेडोसीव को 2-0 से हराकर खिताब जीता.आनंद ने 14वें राउंड में सफेद मोहरों से रूस के अलेक्जेंडर ग्रिसचुक को हराने से पहले दो ड्रॉ खेले. दूसरी ओर कार्लसन को रूस के ब्लादीस्लाव अर्तेमीव ने ड्रॉ पर रोका जिससे आनंद उनके साथ संयुक्त शीर्ष पर आ गए.आखिरी दौर में आनंद ने चीन के बू शियांग्जी से ड्रॉ खेला जबकि कार्लसन को ग्रिसचुक के हाथों अप्रत्याशित हार झेलनी पड़ी.पंद्रह दौर के बाद आनंद छह जीत और नौ ड्रॉ के बाद अपराजेय रहे. इस सत्र में खराब फॉर्म से जूझ रहे आनंद ने वर्ष का अंत खिताबी जीत से करके नये सत्र के लिए उम्मीदें जगाई हैं.आनंद ने चौदह साल बाद पहला रैपिड विश्व खिताब अपने नाम किया.

जीत के बाद उन्होंने कहा ,‘‘पिछले दो रैपिड टूर्नामेंट काफी खराब रहे थे. मैं यहां निराशावादी सोच के साथ उतरा था लेकिन यह अद्भुत सरप्राइज रहा लेकिन मैने अच्छा खेला.’’पूर्व विश्व चैम्पियन पूरे टूर्नामेंट में अपराजेय रहे और टाइब्रेकर में ब्लादीमिर फेडोसीव और इयान नेपोम्नियाश्चि को हराकर खिताब अपने नाम किया. उन्होंने दो गेम के टाइब्रेकर में फेडोसीव को 2-0 से हराया.आनंद ने कहा कि यह साल उनके लिए काफी कठिन रहा. उन्होंने कहा ,‘‘लंदन शतरंज क्लासिक टूर्नामेंट बड़ा निराशाजनक रहा. ऐसा नहीं है कि लंदन में मुझे काफी अपेक्षायें थी लेकिन फिर भी मुझे लगा था कि मैं अच्छा प्रदर्शन करूंगा. आखिरी स्थान पर रहना मेरे लिये करारा झटका था.’’उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट के पहले दिन उन्हें बहुत अच्छा लगा क्योंकि वह अच्छा खेल रहे थे और इससे उन्हें अपने पुराने दिन याद आ गए. आनंद ने कहा ,‘‘ पहले दिन मुझे लगा कि मैं अच्छा खेल रहा हूं. ऐसा लगा कि समय मानों थम गया है. मैं उस दौर में पहुंच गया हूं जब रैपिड शतरंज टूर्नामेंट में मेरा दबदबा हुआ करता था. इससे मेरा आत्मविश्वास काफी बढा. इसके अलावा मैने पीटर लेको को हराया. मेरी सोच बदल गई.’’विश्व चैम्पियन मैग्नस कार्लसन पर मिली जीत को टूर्नामेंट का अहम क्षण बताते हुए उन्होंने कहा ,‘‘निर्णायक मोड़ कार्लसन पर मिली जीत था. वह बू शियांग्जी से हार के बाद लौट रहा था. वह हमेशा की तरह शानदार फॉर्म में था और ठान लेने पर जीत दर्ज करने में माहिर है. उस समय मुझे लगा कि वह प्रबल दावेदार है.’’उन्होंने कहा ,‘‘लेकिन यह काफी करीबी मुकाबला था. ब्लिट्ज और रैपिड शतरंज में दबदबा बनाने वाले खिलाड़ी को हराना अच्छा रहा. हमारी प्रतिद्वंद्विता के इतिहास और करीबी मुकाबलों को देखते हुए यह कुछ खास था ’’ आनंद ने यह भी कहा कि एकबारगी उन्हें लगने लगा था कि वह पोडियम फिनिश नहीं कर सकेंगे लेकिन घटनाक्रम बदला और उन्होंने आखिरी दिन शीर्ष खिताब जीता.उन्होंने कहा ,‘‘ पहले तीन दौर ड्रॉ रहे. मुझे लगा कि मैं भटक रहा हूं और लगा कि पोडियम फिनिश भी नहीं कर सकूंगा.’’ उन्होंने कहा ,‘‘मुझे लगता है कि कई अप्रत्याशित उतार चढाव आये. मैग्नस हार गया. नेपो जीता और बहुत कुछ हुआ. टाइब्रेकर में मुझे फायदा मिला.’’उन्होंने कहा ,‘‘ मैं इस टूर्नामेंट में आने की सोच भी नहीं रहा था. सबसे अच्छी बात तो यह है कि मेरे पास फिर विश्व चैम्पियन का खिताब है । मैं अपनी खुशी बयां नहीं कर सकता.’’