शाकाहार अपनाने के बाद फिटनेस में काफी बदलाव आया ; विराट कोहली

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टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली को खेलों की दुनिया के सबसे बेहतरीन एथलीटों में से एक माना जाता है। 2018 में जब उन्होंने इस राज से पर्दा उठाया कि वे शाकाहारी हो गए हैं तो सब हैरान रह गए थे। कप्तान अक्सर यह बात कहते हैं कि शाकाहार अपनाने के बाद उनके फिटनेस और स्टेमिना में काफी बदलाव आया है। विराट कोहली के नेतृत्व वाली भारतीय टीम में भी काफी बदलाव देखने में आए हैं। टीम फॉर्म में है और सभी खिलाड़ी परफॉर्म कर रहे हैं। विराट कोहली खुद को फिट और फोकस रखने के लिए एक खास डाइट प्लान फॉलो करते हैं। विराट ने बताया कि 2016 में मीट छोड़ने का उनका फैसला सबसे बेस्ट था। उन्होंने बताया कि शाकाहारी बनने के बाद उन्हें सबसे ज्यादा अच्छा महसूस हुआ।

इंडिया टुडे के एक कार्यक्रम के दौरान विराट ने बताया, ''पिछले डेढ़ साल से वह शाकाहारी हैं। इससे पहले भी मैं सिर्फ वही मीट खाता था जो मेरे लिए ठीक था। मेरे ख्याल से जनवरी 2016 से आईपीएल के अंत तक यानि जब हमने टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत की थी। उस दौरान हम सिर्फ 5-6 महीने हम टी-20 क्रिकेट ही खेलते थे। इस दौरान मैंने लिफ्ट करना शुरू किया और लाल मांस खाना शुरू किया। ऐसे में मैं काफी ज्यादा लाल मांस खाता था।'' 

विराट कोहली ने इस दौरान टीम इंडिया के पूर्व फिटनेस ट्रेनर शंकर बासु को भी श्रेय दिया, जिन्होंने उन्हें उनके शरीर को समझने में मदद की। साथ ही बासु ने विराट के साथ काफी वक्त बिताया और उनकी बॉडी के बारे में भी बताया। 

विराट कोहली ने आगे बताया, ''इसलिए मैं एक बहुत ही आक्रामक एथलीट बना और मैं पावर गेम वास्तव में अच्छी तरह से खेल पा रहा था, लेकिन फिर टेस्ट मैच एक साथ आए। लेकिन मुझे फैट बढ़ाना था। मुझे ज्यादा कार्बोहाइड्रेट की जरुरत थी। मुझे लगता है बासु सर का होना मेरे लिए सबसे बड़ी मदद थी। जैसा कि वह मेरे बॉडी को अच्छी तरह समझते थे और मुझे लगातार बताते थे कि मुझे क्या खाना चाहिए और क्या नहीं।।'' 

विराट ने बताया कि इसके साथ ही वह मुझे यह भी बताते थे कि मुझे कैसी ट्रेनिंग करनी है और कैसी नहीं। कब आराम करना है और आराम करते वक्त क्या करना है। कैसे रिकवर करना है और मैं उन्हें पूरी तरह से फॉलो करता था। 

उन्होंने कहा, ''मैंने बस उन्हें सुनता था और तब मैंने खुद को समझना शुरू किया। वे मुझसे कहते थे कि तुम जानते हो तुम्हें क्या करना है और मैं फ्रेश होकर कमबैक करता था, जब मैं ब्रेक पर होता था। अब मैं खुद को समझने लगा था। मैं हमेशा सीखना चाहता था। यह उसी तरह है जब आप बल्लेबाजी करने के लिए मैदान पर जाते हैं और आप शतक मारते हैं, यह अचानक नहीं होता।''