नेशनल में खेलने के लिए नहीं थे पैसे, टीचर ने की मदद

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रोहतक.गांव चिड़ी के राजमिस्त्री की बेटी किरण  का  सफर बेहद मुश्किलों भरा रहा। आर्थिक रूप से कमजोर व चार लड़कियों वाले परिवार में खेल का खर्च उठाने की हैसियत नहीं थी। इस वजह से उसकी प्रैक्टिस का बेहद विरोध हुआ। टीचर ने उसके नेशनल चैंपियनशिप में भाग लेने का खर्चा उठाया तो उसने भी जिद करते हुए खेल जारी रखा। दो बार नेशनल व 6 बार स्टेट चैंपियन बनने के बाद परिवार का भी विरोध खत्म हाे गया। करीब दो माह पहले पटियाला में हुई ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी जीतने के बाद अब वह वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में खेलने इटली जाएगी। 

मात्र 6 माह की प्रैक्टिस में ही बनी चैंपियन
सितंबर, 2009 में चिड़ी के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में जब किरण नौवीं में पढ़ती थी तब कोच संजय ने एसएसए के तहत ट्रेनिंग देनी शुरू की। बाद में सुषमा नांदल व अन्य अध्यापिकाओं के आग्रह पर संजय इस स्कूल में लड़कियों को वुशु सिखाने लगे। किरण में इतनी प्रतिभा थी कि उसने मात्र 6 माह में ही स्टेट व नेशनल में कांस्य पदक जीता। जब उसने शुरू में वुशु खेलना शुरू किया तो घरवालों ने विरोध किया। यहां तक कि नेशनल में खेलने के लिए फीस भी स्कूल की अध्यापिका सुषमा नांदल ने अपनी जेब से दिए। मेडल जीतने के बाद परिवार ने विरोध बंद कर दिया।
 
किरण ने दिखाई राह, 20 स्टेट व नेशनल चैंपियन बने
किरण की सफलता से प्रेरणा लेकर और काेच संजय की मेहनत का परिणाम है कि अब लाखनमाजरा में वुशु की पूरी एकेडमी बन गई है। 20 से ज्यादा स्टेट व नेशनल के वुशु खिलाड़ी हैं। वहीं, किरण की तीन छोटी बहनें और एक भाई भी है। लगातार नेशनल प्रतियोगिता जीतने से अब उसे पुरस्कार मिलने लगे हैं। लाखनमाजरा के कॉलेज में पढ़ने वाली किरण कहती हैं कि वह अपने पुरस्कारों से भाइयों और बहनों को खूब पढ़ाऊंगी।