सिंधु ने रचा इतिहास, चीनी खिलाड़ी को हराकर जीता ब्रॉन्ज मेडल

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नई दिल्ली: टोक्यो ओलंपिक्स में में भारत को एक और मेडल मिल गया है. भारतीय बेडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु (PV Sindhu) ने भारत चीन की हे बिंगजियाओ को 21-13, 21-15 से शिकस्द देकर मेडल अपने नाम किया है. वह रियो में रजत पदक जीतने में सफल भी रही थीं और अब उन्होंने इस बार कांस्य पदक अपने नाम किया है.सिंधु ओलंपिक्स खेलों में दो मेडल जीतने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं. इससे पहले यह रिकॉर्ड पुरुषों में पहलवान सुशील कुमार (कांस्य- बीजिंग 2008, रजत- लंदन 2012) ने यह कारनामा किया था. पीवी सिंधु पूर्व वालीबॉल खिलाड़ी पी.वी. रमण (PV Raman) और पी. विजया के घर 5 जुलाई 1995 में पैदा हुईं. रमण भी वालीबाल खेल के बेहतरीन खिलाड़ी थे. साल 2000 में उन्हें भारत सरकार की तरफ अर्जुन पुरस्कार (Arjuna Award) से नवाजा जा चुका है. उनके माता-पिता पेशेवर वॉलीबॉल खिलाड़ी थे लेकिन सिंधु ने 2001 के ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियन बने पुलेला गोपीचंद से प्रभावित होकर बैडमिंटन को अपना करियर चुना और महज आठ साल की उम्र से बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया. सिंधु ने सबसे पहले सिकंदराबाद में इंडियन रेलवे सिग्नल इंजीनियरिंग और दूर संचार के बैडमिंटन कोर्ट में महबूब अली के मार्गदर्शन में बैडमिंटन की बुनियादी बातों को सीखा. इसके बाद वे पुलेला गोपीचंद के गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी में शामिल हो गईं. आगे चलकर वे मेहदीपट्टनम से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की हैं. टोक्यो में पीवी सिंधू की सफलता में गोपीचंद का नहीं इसका है हाथ टोक्यो ओलंपिक में पीवी सिंधू ने रविवार को चीन की खिलाड़ी ही बिंग जियाओ को 21-13, 21-15 के अंतर से मात देकर लगातार दूसरी बार ओलंपिक पदक अपने नाम किया. रियो ओलंपिक के खिताबी मुकाबले में स्पेनिश खिलाड़ी कैरोलिना मरीन से मात खाने वाले पीवी सिंधू ने रजत पदक जीतकर इतिहास रचा था. वो ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं. इस कड़ी में सिंधू ने एक और अध्याय जुड़ गया है. वो सुशील कुमार के बाद ओलंपिक खेलों में लगातार दो पदक जीतने वाली दूसरी और पहली भारतीय महिला खिलाड़ी भी बन गई हैं. सिंधू ने रियो ओलंपिक में राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद की देखरेख में रजत पदक अपने नाम किया था. लेकिन इस बार गोपीचंद पीवी के साथ कोर्ट पर नजर नहीं आए. इस बार मैदान पर सिंधू के साथ थे उनके नए कोच दक्षिण कोरिया के पूर्व खिलाड़ी पार्क ताई सांग. सांग की देखरेख में ही पीवी सिंधू ने कोराना संकट के बीच ओलंपिक खेलों के लिए तैयारी की थी और लगातार दूसरी बार ओलंपिक खेलों में पदक हासिल करने में सफल रहीं. रणनीतिक कोच के रूप में है पहचान पार्क ताई सांग की पहचान एक रणनीतिक कोच के रूप में रही है. उनके साथ ही उन्होंने ओलंपिक पदक का रंग बदलने के लिए कड़ी मेहनत की थी. दोनों की जोड़ी ने हैदराबाद के गाउची बाउली स्टेडियम में कड़ा अभ्यास किया था. सिंधू ने ओलंपिक से पहले एक इंटरव्यू में पार्क की देखरेख में उनके खेल में आए सुधार पर चर्चा की थी. सिंधू ने बताया था कि पार्क ने उनके साथ रणनीतिक तौर पर काम करने में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने सबसे ज्यादा काम विरोधी खिलाड़ियों के खेले और रणनीति को समझने में किया जिसका परिणाम ओलंपिक में पदक के रूप में मिला. मुश्किल परिस्थिति में वापसी की दी सीख पार्क ने सिंधू को मुश्किल और दबाव की स्थिति से बाहर निकालने पर काम किया है. इसी वजह से दोनों की जोड़ी रंग जमा रही है. पुलेला गोपीचंद जहां साइडलाइन पर बेहद शांत नजर आते थे उससे ठीक उलट पार्क वहां बैठकर आक्रामकता दिखाते हैं और सिंधू को भी मॉटीवेट करते हैं. वो हमेशा सलाह के लिए तैयार रहते हैं और आंखों आखों में अपनी सलाह दे जाते हैं जिसका फायदा सिंधू को मिलता है. इसी वजह से सिंधू के टोक्यो ओलंपिक में सफलता का श्रेय पार्क को जाता है. ऐसा रहा है पार्क ताई सांग का करियर पार्क ताई सांग साल 1990 से 2000 के बीच बीडब्लू सर्किट में सक्रिय रहे हैं. उन्होंने साल 2004 में एथेंस ओलंपिक में शिरकत की थी और क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे थे. साल 2002 में उन्होंने पुरुष एकल का स्वर्ण पदक अपने नाम किया था. इसके अलावा उन्होंने एशिया कप, सुदरीमन कप और एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक अपने नाम किए. टोक्यो ओलंपिक की अलग बात करें तो पीवी सिंधू ने अपना दबदबा दिखाया है, सेमीफाइनल मुकाबले को अगर छोड़ दें तो उसके अलावा सिंधू ने एक भी सेट नहीं गंवाया है. हालांकि चीनी ताईपेई की खिलाड़ी के खिलाफ उन्हें लगातार दो सेट में ही हार का मुंह देखना पड़ा लेकिन इसके बाद कांस्य पदक के मैच में उन्होंने शानदार खेल दिखाते हुए चीनी खिलाड़ी को मात देकर कांस्य पदक पर कब्जा कर लिया. टोक्यो ओलंपिक के बाद भी पार्क पीवी सिंधू के साथ दिखाई देते रहेंगे. PV Sindhu Awards list ➤ अंतरराष्ट्रीय सर्किट में, सिंधु कोलंबो में आयोजित 2009 सब जूनियर एशियाई बैडमिंटन चैंपियनशिप में कांस्य पदक विजेता रही हैं ➤ उसके बाद उन्होंने 2010 में ईरान फज्र इंटरनेशनल बैडमिंटन चैलेंज के एकल वर्ग में रजत पदक जीता ➤ 2009 में मेक्सिको में आयोजित जूनियर विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची. ➤ 2010 के थॉमस और उबर कप के दौरान वे भारत की राष्ट्रीय टीम की सदस्य रही. ➤ 2012 में उन्होंने एशिया यूथ अंडर-19 चैम्पियनशिप के फाइनल में जापानी खिलाड़ी नोजोमी ओकुहरा को 18-21, 21-17, 22-20 से हराया. ➤ 2012 में चीन ओपन (बैडमिंटन) सुपर सीरीज टूर्नामेंट में लंदन ओलंपिक 2012 के गोल्ड मेडल विजेता चीन के ली जुएराऊ को 9-21, 21-16 से हराकर सेमी फाइनल में प्रवेश किया. ➤ पीवी सिंधु चीन के ग्वांग्झू में आयोजित 2013 के विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में एकल पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी है. इसमें उन्होंने ऐतिहासिक कांस्य पदक हासिल किया था. ➤ 2013 को कनाडा की मिशेल ली को हराकर मकाउ ओपन ग्रां प्री गोल्ड का महिला सिंगल्स खिताब जीता है. ➤ पी. वी. सिंधु ने 2013 दिसम्बर में भारत की 78वीं सीनियर नैशनल बैडमिंटन चैम्पियनशिप का महिला सिंगल खिताब जीता. ➤ इन सब के अलावा पीवी सिंधु को साल 2013 में अर्जुन अवार्ड, 2015 में पद्म श्री, 2020 पद्म भूषण और 2016 में राजीव गांधी खेल रत्न (भारत का सर्वोच्च खेल पुरस्कार ) से भी नवाजा जा चुका है.