सुरेश रैना का कश्‍मीरी पंडितों को लेकर बड़ा बयान

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नई दिल्‍ली: क्रिकेटर सुरेश रैना (Suresh Raina) अभी टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं. वे नीदरलैंड्स में पत्‍नी के साथ हैं और सर्जरी के बार रिहैब की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं. रविवार को उन्‍होंने कश्‍मीरी पंडितों (Kashmiri Pandits) के बारे में ट्वीट किया और कहा कि वे फिर से अपने घर जाना चाहेंगे. बता दें कि रैना का परिवार मूल रूप से जम्‍मू कश्‍मीर का रहने वाला है. लेकिन उनका जन्‍म उत्‍तर प्रदेश के मुरादनगर में हुआ था. उनके पिता फौज में थे और वे कश्‍मीर से यूपी आए थे. रैना का परिवार मूलत: रैनावाड़ी का रहने वाला है. रैना ने बीजेपी सांसद राज्‍यवर्धन राठौड़ (Rajyavardhan Rathore) के वीडियो को रिट्वीट करते हुए लिखा, ' कश्‍मीरी पंडितों की हालत पर मदद करने के लिए नरेंद्र मोदी और राज्‍यवर्धन राठौड़ का शुक्रिया. हम सब बहुत जल्‍दी लौटेंगे.'

राठौड़ ने 'अवार्ड वापसी गैंग' को घेरा
वहीं राज्‍यवर्धन राठौड़ ने कश्‍मीरी पंडितों के बारे में बोलते हुए इंटॉलरेंस और अवार्ड वापस करने वालों को घेरा. उन्‍होंने अनुच्‍छेद 370 हटाने और नागरिकता संशोधन कानून लागू करने का समर्थन भी किया. उन्‍होंने कहा, 'आज सोशल मीडिया पर अपने देशवासी कश्‍मीरी पंडितों की आपबीती सुनकर, उनकी पुराने यादें देखकर दिल दहलता है. अपने ही देश में अपने पुश्‍तैनी मकानों को, अपनी पूरी संपत्ति को छोड़कर रात के अंधेरे में जान बचाकर भागना पड़े और अपने ही देश में रिफ्यूजी बनना पड़े, ऐसा कौनसे देश में हआ. हमारे देश में हुआ. 30 वर्ष से ये लोग रिफ्यूजी बनकर रह रहे हैं और आज एक वर्ग है जो बात करता है इंटॉलरेंस की, ह्यूमन राइट्स की. कहां थे ये लोग जब कश्‍मीरी पंडि़तों के साथ यह हो रहा था.'

दहशतगर्द कहते थे कि बस पाकिस्‍तानी सेना आने वाली है'
बकौल राठौड़, '1992 में तो यह हाल थे कि वहां पर दहशतगर्द कहते थे कि बस पाकिस्‍तानी सेना आने वाली है. 1994 में मैं वहां पर एक सैनिक के रूप में था और कश्‍मीरी पंडितों के साथ जो हुआ वह सुनने को मिला. किस बर्बरता से वहां पर उनकी महिलाओं को गुलाम बनाया गया और क्‍या क्‍या सलूक उनके साथ किया गया. बस हैवानियत थी और कुछ नहीं था.'

उन्‍होंने आगे कहा, 'ये इंटॉलरेंस, ये अवार्ड वापसी वाले पिछले 3 दशक से चुप थे. आज जब पहली बार एक पॉलिटिकल करेक्‍शन कश्‍मीर में किया गया है 370 हटाकर तो कश्‍मीरियत याद आ गई. कहां थी कश्‍मीरियत जब कश्‍मीरी पंडितों के साथ यह हो रहा था. 1990 में जब कत्‍लेआम हो रहा था. आज जब सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्‍ट लाकर जिनके साथ ऐसा ही सलूक दूसरे देशों में हो रहा है उनको शरण देने की बात हो रही है तो वापस उसमें रोक लगाना चाहते हैं. ये वीडियो मैसेज उन टुकड़े टुकड़े गैंग के लिए नहीं है. यह हमारे युवाओं के लिए हैं जो इस देश से जुड़े हुए हैं. हम सब एक चाल चलेंगे तो यह देश मजबूत होगा.'