भारतीय फुटबॉल खिलाड़ियों की कहानी, कोई किसान तो कोई मेकैनिक का बेटा

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नई दिल्ली: देश में क्रिकेट को ज्यादा तवज्जो दी जाती है. इसके पीछे कोई भी खेल आगे नहीं टिकता. लेकिन भारत में कई युवा ऐसे भी हैं जिन्होंने क्रिकेट नहीं फुटबॉल को पहली पसंद माना. फुटबॉल का जुनून ऐसा कि गरीबी में भी फुटबॉल का साथ नहीं छोड़ा और टीम इंडिया की अंडर-17 टीम में शामिल हुए. 8 अक्टूबर से फुटबॉल का महाकुंभ यानी अंडर-17 वर्ल्ड कप की शुरुआत हो रही है. जो भारत में खेला जाएगा.  इसमें कुल 24 टीमें खेलेंगी. 52 मैच होंगे. इसका फाइनल 28 अक्टूबर को कोलकाता में होगा. इस मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं भारतीय फुटबॉल के खिलाड़ियों की कहानी. कैसे जिद और जुनून के चलते उन्होंने टीम में जगह बनाई.

फीफा अंडर 17 वर्ल्‍डकप : किसान पिता और मछली बेचने वाली मां का बेटा अमरजीत है भारतीय टीम का कप्‍तान

अमरजीत सिंह
मणिपुर के अमरजीत सिंह को टीम का कप्‍तान चुना गया. अमरजीत सिंह कियाम के पिता किसान हैं जबकि मां मछली बेचती है. मणिपुर के थाउबाल जिले की हाओखा ममांग गांव के अमरजीत के लिए फुटबॉल खेलना प्रारंभ करने से लेकर कप्‍तान बनने तक का सफर आसान नहीं रहा. अमरजीत ने कहा, "मेरे पिता किसान है और खाली समय में बढ़ई का काम करते है, मेरी मां गांव से 25 किलोमीटर दूर जाकर मछली बेचती है ताकि मेरा फुटबॉल खेलने के सपना पूरा हो सकें." फीफा अंडर-17 वर्ल्‍डकप में भारतीय टीम की बागडोर मणिपुर के अमरजीत सिंह कियाम संभाल रहे हैं. कप्‍तानी के लिए उनका चयन आश्‍चर्यजनक रूप से 'लोकतांत्रिक प्रणाली' से किया गया. भारतीय टीम के कोच लुई डि मातोस ने अंतरिम वोटिंग के जरिये प्‍लेयर्स को कप्‍तान चुनने को कहा था जिसमें ज्‍यादातर खिलाड़ि‍यों की राय अमरजीत के पक्ष में रही. खिलाड़ि‍यों की इस राय का पूरा सम्‍मान करते हुए मणिपुर के इस खिलाड़ी को टीम का कप्‍तान चुना गया. अमरजीत सिंह कियाम के पिता किसान हैं जबकि मां मछली बेचती है. टीम के कप्‍तान बनाए जाने पर अमरजीत ने इसे बड़ा सम्‍मान बताया था. उन्‍होंने कहा कि भारतीय टीम की कप्‍तानी करते हुए वे खुद को सम्‍मानित महसूस कर रहे हैं. मिडफील्‍डर की पोजीशन पर खेलने वाले अमरजीत ने कहा, "जब कोच ने मुझे कहा कि मैं टीम का कप्तान चुना गया हूं तो मैं हैरान था. अमरजीत ने भारतीय टीम की मजबूती इसकी एक यूनिट के रूप में खेलने की खूबी को बताया.  मणिपुर के थाउबाल जिले की हाओखा ममांग गांव के अमरजीत के लिए फुटबॉल खेलना प्रारंभ करने से लेकर कप्‍तान बनने तक का सफर आसान नहीं रहा. उनके पिता किसान है और उनकी फुटबॉल की जरूरतों को पूरा करने के लिए मां मछली बेचती है.अमरजीत ने कहा, "मेरे पिता किसान है और खाली समय में बढ़ई का काम करते है, मेरी मां गांव से 25 किलोमीटर दूर जाकर मछली बेचती है ताकि मेरा फुटबॉल खेलने के सपना पूरा हो सकें." कप्तानी को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, "टीम में जब ज़रूरत होती है, मैं तभी बोलता हूं. अगर ज़रूरी नहीं हुआ तो मैं नहीं बोलता हूं. मैं चाहता हूं कि सभी को अपने तरीके से कप्तान रहे और अपनी भूमिका में हावी रहे."

aniket jadhav

अनिकेत जाधव
अनिकेत जाधव टीम इंडिया की अंडर-17 टीम में फॉरवर्ड प्लेयर हैं. अनिकेत ने यह सपना तब देखा था, जब घर की माली हालत मुश्किल भरी थी. पिता मिल की नौकरी छूटने के बाद गैराज में मेकैनिक के तौर पर काम करने लगे थे. लंबे समय तक वहां भी बात नहीं बनी तो ऑटोरिक्शा चलाने लगे. इन मुश्किल हालात में भी पिता ने अनिकेत को खेलने से नहीं रोका. वह 6 साल की उम्र से खेलने लगे थे.

komal thatal

कोमल थटाल
कोमल थटाल टीम इंडिया की अंडर-17 टीम के शानदार प्लेयर हैं. उनसे काफी उम्मीदें लगाई जा रही हैं. उनके माता-पिता टेलर हैं. कोमल फुटबॉल खेलना चाहते थे. पैसे नहीं होने के कारण रद्दी कपड़ों से गेंद बनाकर ही फुटबॉल खेलने लगते थे. इस गेंद के साथ शुरू हुआ सफर अब भारत टीम अंडर-17 टीम तक जा पहुंचा है.

21 सदस्यीय भारतीय फुटबॉल टीम में से 11 खिलाड़ी मणिपुर से

पहली बार फीफा वर्ल्ड कप खेल रही भारतीय टीम में शामिल 21 खिलाड़ी इस बड़े मंच को लेकर उत्साहित हैं. ये सभी अमेरिका के खिलाफ 6 अक्टूबर को पहले मैच में उतरते ही एक नया इतिहास रच देंगे और फीफा वर्ल्ड कप खेलने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बन जाएंगे. ये खिलाड़ी वर्ल्ड कप खेलकर एक ऐसा इतिहास लिख देंगे जो बाईचुंग भूटिया, सुनील छेत्री और आईएम विजनय जैसे भारत के कई अन्य स्टार फुटबॉलर भी नहीं कर पाए. 21 सदस्यीय भारतीय फुटबॉल टीम में से 11 खिलाड़ी मणिपुर से हैं, जिसे भारतीय फुटबॉल का पावर हाउस माना जाता है. आइए एक नजर डालें पहली बार फीफा वर्ल्ड कप खेलने जा रही भारतीय टीम के उन पांच खिलाड़ियों पर जिन पर रहेंगी सबकी निगाहें.