लंदन जैसा खेल विश्वविद्यालय भारत में भी बनेगा

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भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने भारत में उच्च स्तरीय खेल सुविधाएं मुहैया कराने के लिए लंदन के कई विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर एक योजना पर काम शुरू किया है। इस योजना के तहत देश में उच्च मानक प्राप्त इंडोर स्टेडियम बनाने के साथ ही देश में प्रशिक्षकों को तकनीकी प्रशिक्षण देने का काम किया जाएगा। भारत में खेल सामान बना रहे औद्योगिक घरानों को भी विदेशी तकनीक मुहैया कराने के लिए इंग्लैंड के कई विश्वविद्यालयों का साथ मिलेगा। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए जल्द ही साई एक समझौता पत्र इंग्लैंड के विश्वविद्यालयों और सरकार को भेजेगा। दरअसल, ब्राजील के रियो डि जिनेरियो में हुए ग्रीष्मकालीन ओलंपिक 2016 में भारत ने अब तक का सबसे बड़ा दल भेजा था। इसमें 117 खिलाड़ी शामिल थे। इतने बड़े दल को देश से विदाई देते समय भारतीयों ने पदक सूची में ऊंची छलांग की उम्मीद की थी, लेकिन ऐेसा हो नहीं पाया। अंतिम समय में दो पदक के साथ भारतीय दल देश लौटा। खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर क्यों भारत 2012 के लंदन ओलंपिक में जीते छह पदकों के आंकड़े को पार करने नाकाम रहा।

इसके बाद साई ने अगले ओलंपिक तक खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए एक समिति बनाई। इसे टारगेट ओलंपिक पोडियम (टॉप) योजना का नाम दिया गया है। साथ ही रियो से लौटने के बाद साई के निदेशक इन्जेती श्रीनिवास ने एक रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें भारत में खेल और खिलाड़ियों के बीच कमजोर कड़ी को तलाशने और दूर करने की बात कही गई थी। अब इस पर काम शुरू कर दिया गया है। पिछले महीने इंग्लैड गए साई निदेशक ने यहां के कई विश्वविद्यालयों के साथ बैठक कर भारत में उच्चस्तरीय खेल तकनीक को विकसित करने के लिए साझेदारियों पर चर्चा की। इसके तहत पूरे यूरोप में खेल तकनीक विकास में विख्यात इंग्लैंड के लैंघमबर्ग विश्वविद्यालय के साथ कई समझौतों पर बात हुई और कुछ पर विश्वविद्यालय प्रशासन सहायता देने को तैयार हो गया है। इसकी सहायता से लंदन स्थित इंडोर स्टेडियम की तरह भारत में भी एक इंडोर स्टेडियम बनाया जाएगा। इसे बनाने में लगभग दस करोड़ डॉलर की लागत आएगी। इस स्टेडियम में 150 मीटर लंबा ट्रैक बिछाया जाएगा ताकि किसी भी मौसम में भारतीय एथलीट अभ्यास से वंचित न रहें। स्टेडियम को उच्च मानक के साथ तैयार किया जाएगा ताकि इसमें अंतरराष्ट्रीय मुकाबले भी हो सकें।

गौरतलब है कि भारत में मौसम विविधता के कारण खिलाड़ियों को साल के लगभग पांच महीने यानी 150 दिन अभ्यास की सुविधा नहीं मिल पाती है। साई ने अपने रिपोर्ट में इसे भी रियो में खिलाड़ियों के लचर प्रदर्शन के महत्त्वपूर्ण कारकों में एक बताया था। भारत में प्रस्तावित राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय (एनएसयू) के लिए तैयार हो रहे पाठ्यक्रम में भी लैंघमबर्ग विश्वविद्यालय के विज्ञानियों का सहयोग लिया जाएगा। साथ ही देश से खिलाड़ी और इस पाठ्यक्रम में शामिल कोच प्रशिक्षण के लिए इंग्लैंड जा सकेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पर भी सहमति जाता दी है।भारत में बनाए जा रहे खेल के सामान में तकनीकी विकास के लिए यहां के वैज्ञानिक भारतीय मानक ब्यूरो के साथ समझौता करेंगे। और भारतीय प्रोद्यौगिकी संस्थान (आइआइटी) इनके साथ मिलकर खेल के विकास के लिए शोध भी करेगा। साई अब जल्द ही एक समझौता पत्र इन विश्वविद्यालय प्रशासकों को भेजेगा।