स्पोर्ट्स कोड को कड़ाई के साथ लागू किया जाएगा ; विजय गोयल

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नई दिल्ली। केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर स्पष्ट किया कि देश में स्पोर्ट्स कोड को कड़ाई के साथ लागू किया जाएगा और यह सर्वाेच्च अदालत द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति की सख्त सिफारिशों से भी कहीं आगे होगा।

गोयल ने बताया कि सभी खेल संघ स्पोट््र्स कोड लागू करने में न केवल अपना पूरा सहयोग और समर्थन दे रहे हैं, बल्कि ये भी बता रहे हैं कि कहां-कहां इसे लागू किए जाने की जरूरत है।हॉकी के जादूगर स्वर्गीय ध्यानचंद की 112 वीं जयंती के अवसर पर दिल्ली के ध्यानचंद स्टेडियम में एक भव्य समारोह में खेल मंत्री ने साथ ही बताया कि अगले वर्ष से खेल पुरस्कारों के चयन की प्रक्रिया बदल दी जाएगी। इसके लिए एक समिति का गठन किया जाएगा और इस बात पर भी विचार किया जाएगा कि यदि खेल संघ ने किसी योग्य खिलाड़ी का नाम पुरस्कार के लिए गलती से नहीं भेजा तो क्या उसे छूटा हुआ ही मान लिया जाए या फिर उस पर समिति अपनी ओर से विचार करे।

केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री ने मेजर ध्यानचंद को याद करते हुए उन्हें भारत का चांद बताया तथा सभागार में मौजूद खेल पुरस्कार के लिए चुने गए सभी खिलाडिय़ों को बधाई दी और उन्हें पुरस्कार को नगद राशि से नहीं जोडऩे की सलाह दी भी। उन्होंने खिलाडिय़ों की हर संभव मदद करने का अपना पुराना वायदा भी दोहराया।राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर खेल मंत्रालय के सचिव इंजेटी श्रीनिवासन ने इस दिन को आत्म विशलेषण का दिन बताया। उन्होने कहा हमें देखना है कि हम खेलों में क्यों पिछड़ रहे हैं। एक जमाना था कि दुनिया के बड़े नेता एडोल्फ हिटलर मेजर ध्यानचंद के हॉकी मैजिक से मंत्र मुग्ध हो गए थे। फिर ऐसा क्या हुआ कि हम पिछड़ते चले गए।गौरतलब है कि दिल्ली के मेजर ध्यान चंद स्टेडियम का नाम वर्ष 2000 से पहले नेशनल हॉकी स्टेडियम था। मेजर ध्यानचंद के योगदान को देखते हुए स्टेडियम उनको समर्पित कर दिया गया था जहां मंगलवार को उनके जन्मदिवस के मौके पर उपस्थिति गणमान्यों ने उन्हें याद किया।

आज हॉकी के जादूगर के नाम से मशहूर मेजर ध्यानचंद की 112वीं जयंती है, इस मौके पर खेल मंत्री विजय गोयल और किरन रिजिजू ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. ध्यानचंद के जन्मदिन को भारत के राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसी दिन हर साल खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न के अलावा अर्जुन और द्रोणाचार्य पुरस्कार दिए जाते हैं. बता दें कि 29 अगस्त के दिन 1905 को ध्यानचंद्र का जन्म हुआ था.
 
उत्तर प्रदेश के झांसी में जन्मे ध्यानचंद प्रारंभिक शिक्षा के बाद 16 साल की उम्र में पंजाब रेजिमेंट में शामिल हो गए थे. वो 'फर्स्ट ब्राह्मण रेजीमेंट' में एक साधारण सिपाही के रूप में भर्ती हुए थे. 21 वर्ष की उम्र में उन्हें न्यूजीलैंड जानेवाली भारतीय टीम में चुन लिया गया. इस दौरे में भारतीय सेना की टीम ने 21में से 18 मैच जीते.1932 में लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारत ने अमेरिका को 24-1 के रिकॉर्ड अंतर से हराया. इस मैच में ध्यानचंद और उनके बड़े भाई रूप सिंह ने आठ-आठ गोल ठोंके. 1936 के बर्लिन ओलंपिक में ध्यानचंद भारतीय हॉकी टीम के कप्तान थे. 15 अगस्त, 1936 को हुए फाइनल में भारत ने जर्मनी को 8-1 से हराया.1956 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. उनके जन्मदिन को भारत का राष्ट्रीय खेल दिवस घोषित किया गया है. इसी दिन खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार अर्जुन और द्रोणाचार्य पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं.