लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज के रवि यादव का नया कीर्तिमान

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नई  दिल्ली. चोट के चलते एक समय ‌क्रिकेट से दूर होने वाले मध्यप्रदेश के गेंदबाज रवि यादव (Ravi Yadav) आखिरकार अपना नाम रिकॉर्ड बुक में लिखवाने में कामयाब हो ही गए. रवि यादव अपने फर्स्ट क्‍ लास क्रिकेट में डेब्यू के पहले ही ओवर में हैट्रिक लेने वाले दुनिया के पहले गेंदबाज  बन गए हैं. यह भी खास है कि उन्होंने यह कारनामा यूपी के खिलाफ किया, जहां से वह ताल्लुक रखते हैं. मगर मौका न मिलने के कारण उन्हें अपना राज्य छोड़ना पड़ गया था. इससे पहले साउथ अफ्रीका के राइस फिलिप्स के नाम फर्स्ट क्लास क्रिकेट के अपने पहले ओवर में हैट्रिक लेने का रिकॉर्ड था. उन्होंने यह कमाल बॉर्डर की  ओर से ईस्टर्न प्रोविनस के खिलाफ 1939-1940 में किया था, लेकिन उन्‍होंने इससे पहले अपने चार मुकाबलों में गेंदबाजी नहीं की थी.वहीं सात भारतीय गेंदबाजों के नाम डेब्यू मैच में हैट्रिक लेने का रिकॉर्ड हैं. जिसमें जगवाल श्रीनाथ, सलील अंकोला और अभिमन्यु मिथुन काफी चर्चित नाम हैं. हालांकि रवि का यह रिकॉर्ड अपने आप में खास है, क्योंकि उन्होंने डेब्यू के पहले ही ओवर में हैट्रिक ली है.ravi-yadav-became-the-first-bowler-to-pick-up-a-hat-trick-in-his-first-over के लिए इमेज परिणाम

रवि याादव ने क्रिकइंफो से बात करते हुए कहा कि मैच के बाद वह चैन की नींद लेंगे, क्योंकि वह जानते हैं कि वह फर्स्ट क्लास क्रिकेटर बन गए हैं. दरअसल 2010 से 2014 के बीच खेल से दूर होने के बाद उन्होंने इसके बारे में साेचा भी नहीं होगा कि वह फर्स्ट क्लास क्रिकेटर बन जाएंगे. उन्होंने कहा कि यह रिकॉर्ड उन्होंने यूपी के खिलाफ बनाया. वह यूपी में क्रिकेट खेलते हुए बढ़े हुए थे, मगर अंडर 19 के बाद से उन्हें कोई मौका नहीं मिला. रवि के कहा कि अब वह खुश है कि आखिरकार वह अब रणजी खिलाड़ी हैं.

28 साल के रवि लखनऊ के स्पोर्ट्स कॉलेज से हैं. यह वही कॉलेज है, जिसने सुरेश रैना (Suresh Raina) और आरपी सिंह (RP Singh) को क्रिकेटर बनाया. रवि का कहना है कि 2010 में उन्हाेंने रैना को कई बार गेंदबाजी करवाई थी. मगर अब उन्हें नहीं पता कि 'रैना भाई' को याद भी होगा.कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद 2010 से 2014 के बीच चोट ने रवि के करियर को झटका दे दिया. उन्होंने अपने करियर को बर्बाद होते देखा. वह नहीं  जानते थे कि उनका भविष्य कहां है. उन्होंने कहा कि मैंने अंडर19 के अपने टीम के साथियों को बढ़ते हुए देखा और वह सोचते थे कि हम साथ में बढ़े हुए. वह अगले स्तर पर चले गए और मैं वहीं पर हूं. रवि ने बताया कि वें उन्हें देखकर अपना उत्साह बढ़ाते थे. मगर दुर्भाग्य से उन्हें यूपी में मौका नहीं मिला

अब घर में गर्व से बता सकते हैं.
2016 में रवि मध्य प्रदेश चले गए और वहां से खेलने लगे. उन्होंने स्‍थानीय टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन किया और जल्द ही राज्य के नेट बाॅलर बन गए.  तीन साल तक वह नेट बॉलर रहे. सीनियर खिलाड़ी अक्सर उनकी मदद करते थे. इस दौरान उनके परिवार वाले उनसे चिढ़ गए, क्योंकि रवि ने पूरी  तरह से क्रिकेट खेलने के लिए रेलवे  की नौकरी छोड़ दी थी. इस पर परिवार वाले उन पर काफी नाराज हुए. रवि परिवार वालों से आंख भी नहीं मिला पा रहे थे. वें खुद को फेलियर की तरह महसूस  कर रहे थे. मगर अब वह अपने परिवार को गर्व से बुला सकते हैं और उन्हें बता सकते हैं कि उन्होंने रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) में डेब्यू कर लिया है. यहां तक कि हैट्रिक भी ली है.