संजय मांजरेकर ने बताया, क्यों डरते थे पिता से

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मुंबई: पूर्व टेस्ट क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने अपनी आत्मकथा ‘इम्परफेक्ट’ के लोकार्पण के अवसर पर कहा कि अपने पिता और पूर्व क्रिकेटर विजय की मौजूदगी में उन्हें डर का अहसास होता था। मांजरेकर ने वीडियो के जरिए खुद का साक्षात्कार करने का बेजोड़ तरीका अपनाया और खुद के सवाल पर कहा कि पहले मेरी योजना उन्हें किताब में शामिल नहीं करने की थी लेकिन इसके बाद मैंने उन सभी को इसमें जगह देने का फैसला किया जिनका मुझ पर प्रभाव रहा। जब भी वह मेरे करीब होते तो मुझे डर का अहसास होता था जो कि उन दिनों (पिता-पुत्र के बीच) आम बात थी। 

क्रिकेटर से कमेंटेटर बने संजय ने कहा कि जिस तरह से उन्होंने (स्वर्गीय विजय मांजरेकर) मेरे साथ व्यवहार किया उसका एक क्रिकेटर के रूप में मेरी सफलता में काफी योगदान रहा। मुझे खुशी है कि मेरे दोनों बच्चों का क्रिकेट से कोई लेना देना नहीं है और मैंने उन्हें खुद का करियर बनाने की छूट दे रखी है। संजय ने अपने करियर में 37 टेस्ट मैच खेले और 2043 रन बनाये। उनका सर्वोच्च स्कोर 218 रन रहा जो उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ 1989 में बनाए थे। उनका औसत 37 रहा और उनके नाम पर चार शतक दर्ज हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली के आने से मध्यक्रम में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई और इसलिए उन्होंने संन्यास लेने का फैसला किया था। मांजरेकर ने कहा कि मैं वापसी करने के लिए फिर से रणजी ट्राफी की कड़ी परीक्षा से नहीं गुजरना चाहता था। बेबाक टिप्पणियों के मशहूर मांजेरकर ने सचिन तेंदुलकर के साथ अपने रिश्तों पर भी बात की। 

मांजरेकर ने दिलीप वेंगसरकर, अजित अगरकर और राजू कुलकर्णी जैसे पूर्व क्रिकेटरों की मौजूदगी में कहा कि हम मैदान पर एक दूसरे से टकराते थे तो मैं उसे घूरता और मैं उसे। हमारे बीच अच्छे रिश्ते थे। मांजरेकर से पूछा गया कि वह किस कप्तान से सबसे अधिक प्रभावित रहे तो उन्होंने तुरंत ही इमरान खान का नाम लिया।   उन्होंने कहा कि मैं इमरान खान का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। मैं उनके नेतृत्व में खेलना पसंद करता। भारतीयों में मुझे महेंद्र सिंह धोनी पसंद थे। मैं वर्तमान कप्तान विराट कोहली के नेतृत्व में भी खेलना पसंद करूंगा। वह ऐसा कप्तान है जो हारने से घृणा करता है। उन्होंने इंग्लैंड के पूर्व कप्तानों माइकल एथरटन और नासिर हुसैन को अपना पसंदीदा कमेंटेटर बताया।