खेलो इंडिया; 734 खिलाड़ियों को मिलेगी स्कॉलरशिप

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नई दिल्ली भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने  ‘खेलो इंडिया प्रतिभा पहचान विकास योजना’ के तहत 734 खिलाड़ियों का चयन किया है, जिन्हें सरकार से मान्याता प्राप्त आवासीय अकादमियों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन खिलाड़ियों को दैनिक खर्चे, इलाज और दूसरी जरूरतों को पूरा करने के लिए सालाना एक लाख 20 हजार रुपये की राशि दी जाएगी। यह राशि उन्हें चार भागों में तीन-तीन महीने पर दी जाएगी। 

इन खिलाड़ियों को खेलो इंडिया से मान्यता प्राप्त अकादमियों में प्रशिक्षण मिलेगा। इन अकादमियों को खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, रहने और टूर्नमेंट खर्च का ध्यान रखना होगा। खेल मंत्रालय से जारी विज्ञप्ति में कहा गया, ‘देश में पहली बार उभरती हुई प्रतिभाओं के लिए मजबूत पारिस्थितिक व्यवस्था बनाने के लिए विभिन्न निजी, राज्यों और साइ की अकादमियों को मान्याता दी गई है। एक उच्च समिति ने 21 गैर साई अकादमियों को भी मान्याता दी है। हमारी योजना और अधिक अकादमी बनाने की है ताकि युवा खिलाड़ियों को ज्यादा दूर जाए बिना प्रशिक्षण के लिए सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं मिल सके।’ 

इसके लिए एक प्रतिभा पहचान समिति (टीआईसी) का गठन किया गया है जिसमें अर्जुन पुरस्कार और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं को रखा गया है। इस समिति का काम योजना के लाभार्थियों को चुनना और उनके नामों का प्रस्ताव भेजना है। इसमें कहा गया कि चयन किए गए खिलाड़ियों के आयु सत्यापन के लिए वैज्ञानिक और भरोसेमंद ‘टीडब्ल्यू 3’ तरीके का इस्तेमाल किया गया है।  ‘यह भी फैसला किया गया कि अकादमियों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए इन अकादमियों का एक तय अंतराल के बाद विश्लेषण होगा और उन्हें उन्नयन का मौका मिलेगा। जो अकादमी तय मानकों और प्रदर्शन मानदंडों को पूरा नहीं करेंगे उन्हें इस सूची से बाहर कर दिया जाएगा।’ यह भी फैसला किया गया है कि खिलाड़ियों को चोट के बारे में तुरंत सूचना देनी होगा ताकि समय पर रिहैबिलिटेशन शुरू किया जा सके। 

उच्च समिति ने मजबूत प्रदर्शन निगरानी प्रणाली तैयार करने का फैसला किया ताकि इससे जुड़ी सभी इकाइयों से सर्वश्रेष्ठ लिया जा सके। खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि भारतीय खेल व्यवस्था में बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘खिलाड़ियों की प्रतिभा की पहचान युवावस्था में करना सिर्फ हमारा नारा नहीं है यह हमारे काम में भी दिख रहा है। हम ऐसी खेल व्यवस्था तैयार कर रहे हैं जिससे स्थानीय प्रतिभा को भी वैश्विक मंच मिल सके। इससे सभी भारतीयों को खेलों को मनोरंजन, शिक्षा और उत्कृष्टता के लिए अपने जीवन का हिस्सा बनाने में मदद मिल सके।’