कभी नहीं थी क्रिकेट किट

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पूर्णिया। जिले के लाल विजय भारती अब बिहार क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अभी फिलहाल रणजी ट्रॉफी के चयन के लिए आयोजित कैंप का हिस्सा हैं।पटना में इस कैंप का आयोजन किया जा रहा है। विजय भारती का व्यक्तिगत उच्चतम स्कोर 211 रनों का है जो महज 62 गेंदों में उन्होंने बनाया था। इसके अलावा विजय हजारे ट्रॉफी में विजय ने शानदार बल्लेबाजी की थी। वह अबतक दिल्ली, सूरत, बेंगलुरु व पटना में खेल चुके हैं। बिहार टीम में वे सलामी बल्लेबाज हैं। विजय भारती अभी राज्य के उभरते हुए क्रिकेटर हैं। कभी उनके पास खेलने के लिए क्रिकेट किट भी नहीं होती थी, लेकिन अब अपनी लगन और मेहनत की बदौलत क्रिकेट में हिट हैं। उनके पिता सुरेश मलिक कृषि विभाग से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनका कहना है कि विजय की सफलता के पीछे भाई नवकांत भारती का योगदान है। उनके पिता, माता और भाई ने हमेशा खेलने के लिए प्रेरित किया। चार-पांच वर्ष के थे, तब से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। 10-12 साल की उम्र में विधिवत खेलने लगे और स्थानीय प्रशिक्षकों की मदद ली। शुरुआती समय में जिला क्रिकेट संघ के डोमन मिश्रा और हरिओम झा ने उनके खेल को निखारने में अहम योगदान दिया। वे सैय्यद मुस्ताक ट्रॉफी, विजय हजारे आदि क्रिकेट टुर्नामेट में खेल चुके हैं।

दो वर्षो से बिहार टीम में खेल रहे

बिहार टीम में वह दो वर्षो से खेल रहे हैं। वह स्थानीय सिपाही टोला स्थित भुतनाथ मंदिर के पास रहते हैं। स्थानीय क्रिकेट खिलाड़ियों ने उन्हें काफी सहयोग दिया है। उन्होने जिला स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की है। उसके बाद एसएनएसवाइ डिग्री कॉलेज, रामबाग से उन्होने स्नातक की पढ़ाई की है। उनका सपना टीम इंडिया की तरफ से खेलना है। विजय भारती का कहना है जिले में उनके रणजी ट्रॉफी कैंप में और बिहार टीम का प्रतिनिधित्व करने के बाद काफी खिलाड़ियों को प्रेरणा मिली है। अब तो स्थानीय स्तर पर अभिभावक स्वयं खेलने के लिए बच्चों को लेकर आने लगे हैं। क्रिकेट के बेहतर माहौल के कारण यहां से अब कई क्रिकेटरों पर चयनकर्ताओं की नजर है। ईस्ट जोन के चयनकर्ता हरिओम झा कहना है कि क्रिकेट के लिए सीमांचल में अभी कई खिलाड़ी रेस में हैं। विजय भारती ने अपने आपको साबित किया है।