चीन में मस्जिदें गिराई जा रहीं और दुनियाभर में खामोशी

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नस्लीय टिप्पिणयों और अपमान से आहत होकर पिछले साल अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास की घोषणा करने वाले फुटबॉलर मेसुत ओजिल ने अब उइगर मुस्लिमों की प्रताड़ना के खिलाफ आवाज उठाई है। आर्सेनल के 31 वर्षीय मिडफील्डर ने शुक्रवार को कहा कि चीन में मस्जिदें गिराई जा रही हैं। वहां मौलवियों को मारा जा रहा, बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इन सबके बावजूद दुनियाभर के मुसलमान और मुस्लिम देश खामोश हैं।2014 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रहे ओजिल को 2018 फीफा विश्व कप में जर्मनी के ग्रुप चरण में बाहर होने के बाद से नफरत भरे मेल और धमकियां मिल रही थी। इससे आहत होकर जर्मनी की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम छोड़ने वाले ओजिल ने ट्वीट किया, ‘कुरान जलाई जा रही है। मस्जिदें बंद की जा रहीं या तोड़ी जा रहीं। मुस्लिम स्कूलों (मदरसों) पर प्रतिबंध लगा दिया गया। एक-एक करके मुस्लिम धर्मगुरुओं (मौलवियों) को मारा जा रहा। भाईयों को मजबूरन शिविरों में भेजा जा रहा। दुनियाभर के मुस्लिम चुप हैं। उनकी आवाज कहीं नहीं सुनाई दे रही।’

तुर्की उइगर मुस्लिमों का घर माना जाता है
फुटबॉलर ने यह पोस्ट ब्लू बैकग्राउंड पर लिखी। इस पर एक अर्धचंद्र और सितारा भी लगाया है। यह एक तरह का फ्लैग है, जिसे उइगर अलगाववादी इस्तेमाल करते हैं। तुर्की मध्य एशिया से पलायन करने वाले तुर्कों से बना देश है। यह लोग तुर्की भाषा बोलते हैं। यह देश उइगर मुस्लिमों का भी घर माना जाता है। तुर्की लगातार चीन से उइगर मुस्लिमों की समस्या का मामला उठाता आ रहा है।

तुर्की मूल के हैं ओजिल
ओजिल जर्मनी में ही पैदा हुए और पले-बढ़े हैं। पर वह तुर्की मूल के हैं। उनके पूर्वज तुर्की छोड़ जर्मनी में बेहतर जीवन के लिए आए थे। विश्व कप के बाद ओजिल ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि उनके साथ मुस्लिम होने की वजह से भी ऐसा व्यवहार किया जाता है। जर्मनी की टीम में मेरे अलावा और भी प्रवासी हैं। उनको कभी जर्मन-पोलिश नहीं कहा जाता तो मुझे क्यों तुर्किश-जर्मन बुलाया जाता है? क्या इसलिए कि मैं तुर्की से हूं या इसलिए क्योंकि मैं मुसलमान हूं? जब मैं जर्मनी में ही पैदा हुआ पला-बढ़ा तो क्यों लोग नहीं मानते कि मैं एक जर्मन हूं।

शिनजियांग प्रांत में करीब 10 लाख उइगर मुस्लिम कैद
चीन सरकार ने शिनजियांग प्रांत में करीब 10 लाख उइगर मुस्लिमों शिविरों में कैद कर रखा है। इनसे संबंधित एक सरकारी रिपोर्ट पिछले ही महीने लीक हुई थी। इसको दुनिया के 17 मीडिया संस्थानों ने छापा था। इसके मुताबिक, उइगर मुस्लिम कैम्प से भाग न सकें, इसलिए उन्हें दो ताले वाले दरवाजों में रखा जाता है। उन पर 24 घंटे नजर रखी जाती है। टॉयलेट में भी उन पर सैनिकों की नजर होती है।