कदमों पर भी थिरकती है मेरठ की फुटबाॅल!

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रूस में चल रहे फीफा विश्वकप 2018 का रोमांच पूरी दुनिया में देखा जा रहा है. वैसे फुटबॉल के इस महाकुम्भ में भारत भले ही खेल नहीं रहा हो लेकिन वह दूसरे तरीके से दुनिया भर में अपनी छाप जरूर छोड़ रहा है. क्या आप जानते हैं नेमार, मैसी, रोनाल्डो जिस फुटबाल से पूरी दुनिया के दिलों पर राज करते हैं, उनमें से कई फुटबॉल मेरठ में ही बनी हुई हैं. पिछले 43 साल से फुटबॉल बना रही मेरठ की एक कम्पनी ने इस बार विश्व के कोने-कोने में फुटबॉल एक्सपोर्ट किए हैं. परतापुर स्थित हंस रबड़ में आजकल काफी गहमागहमी है. फुटबॉल के महाकुम्भ में ऑर्डर की भरमार है. भारतीय फुटबॉल संघ से मान्यता प्राप्त हंस रबड़ में रोजाना 25 हज़ार ब्लॉडर बनाए जाते हैं. इसका निर्यात पाकिस्तान भी किया जाता है.

2007 फीफा वर्ल्ड कप में प्रयोग हुआ था मेरठ का ब्लॉडर 

भारत की नीविया और कॉस्को के अलावा पाकिस्तान में मल्टीनेशनल कम्पनियों के लिए बनने वाले फुटबॉल भी मेरठ के ब्लॉडर से ऊंचाई भरते हैं. कंपनी के निदेशक डीएल मक्कड़ बताते हैं कि 2007 फीफा वर्ल्ड कप में भी मेरठ के ब्लॉडर का प्रयोग किया गया था. 11 लाख बच्चों तक फुटबॉल पहुंचाने की राष्ट्रीय मुहिम में भी मेरठ की बड़ी भूमिका रही. यूरोपीय चैम्पियंस लीग में भी मेरठ के फुटबॉल और ब्लॉडर की बड़ी खपत है. अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देशों में भी बड़ी मात्रा में निर्यात होता है.आपको जानकार हैरानी होगी कि भारत की महज 3 कम्पनियां भारतीय फुटबॉल संघ से मान्यता प्राप्त हैं, जिसमें कॉस्को, नीविया और हंस रबड़ है. बाइचुंग भूटिया समेत तमाम भारतीय दिग्गज मेरठ में बने हुए फुटबॉल को श्रेष्ठ बता चुके हैं. वैसे फुटबॉल के साथ ही वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, रोलबॉल, रग्बीबॉल भी यहां बनाया जाता है.

रोजाना 25 हज़ार फुटबॉल के ब्लॉडर बनाए जाते हैं यहां

ऐसे बनता है ब्लॉडर 

दरअसल देश के केरल राज्य में रबड़ की खेती होती है. जिससे टपकने वाले दूध लेटेक्स से ब्लॉडर बनाया जाता है. इस प्राकृतिक रबड़ में एक मीटर तक खिंचाव होता है. इसकी खपत ज्यादा है. इसे ब्लॉडर बनाने के बाद 5 दिन तक टेस्टिंग में रखा जाता है. अगर हवा निकलती है तो फीस को निकाल दिया जाता है. बॉल का कवर सिंथेटिक रबड़ से बनाते हैं. 32 पैनल का फुटबॉल दर्जनों प्रक्रियाओं से गुज़रकर विश्वस्तरीय स्पर्धाओं के लिए तैयार होता है. 1975 से ब्लॉडर बना रही हंस रबड़ को भारतीय फुटबॉल संघ से 2007 में मान्यता मिली. अब कम्पनी फीफा की मान्यता के लिए भी प्रयासरत है.