भारतीय बाजार में हिट है कबड्डी

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यह कौन नहीं जानता कि भारत में क्रिकेट को धर्म और क्रिकेटरों को भगवान के रूप में पूजा जाता है। अगर इस माहौल में इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) जैसे आयोजन सुपर हिट होते हैं तो कोई आश्चर्य नहीं लेकिन अगर इसी के साथ अन्य खेलों की लीग भी बंपर कमाई करती हैं और दर्शकों को लुभाती हैं तो यह जरूर शोध का विषय बन जाता है। 2008 में शुरू हुए आइपीएल ने भारत ही नहीं दुनिया के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है।दरअसल, आइपीएल के शुरुआती दौर में कोई नहीं जानता था कि भारत में प्रीमियर लीग का भविष्य क्या है? पहले पांच सत्र के सफल आयोजन ने प्रायोजकों के भीतर यह विश्वास जगाया कि भारत में भी दूसरे देशों की तरह लीग के लिए काफी जगह है।

2012 आते-आते अन्य खेलों से जुड़े लोगों ने और इस तरह के प्रीमियर लीग के आयोजन की पहल की। इसका परिणाम हुआ कि 2016 तक देश में लगभग 14 बड़ी प्रीमियर लीगों का आयोजन होने लगा। इसमें मुख्य तौर पर कबड्डी, बैडमिंटन और कुश्ती जैसे खेलों की लीग भी शामिल थीं। इस समय तक लीग के लिए भारतीय बाजार सज चुका था। ग्रुप एम’ स ईएसपी और स्पोर्ट्सपावर ने मिलकर एक शोध किया जिसमें यह पता चला कि सिर्फ 2016 में भारतीय खेल प्रायोजक बाजार में लगभग 20 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान विज्ञापन कंपनियों ने लगभग 1280 करोड़ रुपए प्रायोजकों के प्रचार-प्रसार पर खर्च किए।