लोकसभा ने पारित किया राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय विधेयक 2018

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लोकसभा ने 3 अगस्त 2018 को राष्‍ट्रीय खेल विश्‍वविद्यालय विधेयक 2018 पारित कर दिया है. राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय विधेयक पर सदन में चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित किया गया.खेल मंत्री कर्नल राज्‍यवर्धन राठौड़ ने विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि इस विश्‍वविद्यालय में शोध, प्रशासन, प्रशिक्षण और अन्य खेलों की गतिविधियों का समावेश होगा.विधेयक लोकसभा में 23 जुलाई 2018 खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर द्वारा पेश किया गया था. यह राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय अध्यादेश, 2018 को प्रतिस्थापित करता है जिसे 31 मई 2018 को जारी किया गया था.

उद्देश्‍य:

इस विधेयक में खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से अपनी तरह का पहला राष्‍ट्रीय खेल विश्‍वविद्यालय मणिपुर में खोले जाने का प्रस्‍ताव है.

विधेयक से संबंधित मुख्य तथ्य:

  • राष्‍ट्रीय खेल विश्‍वविद्यालय का मुख्यालय मणिपुर में होगा.
  • राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर का पहला पूर्ण विकसित खेलकूद विश्वविद्यालय
  • इस विधेयक में देश के विभिन्‍न राज्‍यों के अलावा विदेश में खेलों के अलग-अलग परिसर बनाये जाने का प्रावधान है.
  • विश्‍वविद्यालय के कुलाधिपति और एकेडेमिक काउंसिल के सदस्‍य खेल क्षेत्र से होंगे.
  • विभिन्न राज्यों में वहां की सरकारों से चर्चा करके समुचित सुविधाएं एवं ज़मीन मिलने पर आउटलाइन केन्द्र खोले जाएंगे.
  • केंद्र सरकार विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली की समीक्षा और निरीक्षण करेगी. कार्यकारी परिषद निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर कार्रवाई कर सकती है.
  • विश्वविद्यालय में विदेशी प्रशिक्षकों को भी बुलाया जाएगा ताकि विद्यार्थियों को उनके अनुभव का लाभ मिल सके.
  • विश्वविद्यालय शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान करेगा, खेल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करेगा, और शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग करेगा.
  • मणिपुर में स्थापित होने वाले विश्वविद्यालय में बतौर कुलाधिपति और शिक्षक के रूप में प्रतिष्ठित खिलाड़ियों को नियुक्त किया जाएगा.
  • विश्वविद्यालय देशभर में और भारत से बाहर भी दूरस्थ परिसर स्थापित करने के लिए सशक्त होगा.
  • इसमें शैक्षणिक कार्यक्रमों और अनुसंधान के अतिरिक्त विश्वविद्यालयों एवं इसके दूरस्थ कैंपस उत्कृष्ट खिलाड़ियों, खेलकूद पदधारियों, रेफरियों और अम्पायरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा.
  • मणिपुर में राष्ट्रीय खेलकूद विश्वविद्यालय बनाया जा रहा है जो खेलकूद की विभिन्न विधाओं के राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र के रूप में कार्य करने के साथ खेलकूद विज्ञान, खेलकूद प्रौद्योगिकी, खेलकूद प्रबंधन, खेलकूद प्रशिक्षण तथा खेलकूद अनुसंधान के लिए काम करेगा. इस विश्वविद्यालय के देशभर में ‘दूरस्थ परिसर’ (आउटलाइंग कैंपस) खोले जाएंगे जो एनएसयू के उद्देश्य को हासिल करने में मददग़ार होंगे.

पृष्ठभूमि:

गौरतलब है कि यह विधेयक इस संबंध में 31 मई को राष्ट्रपति द्वारा लागू राष्ट्रीय खेलकूद विश्वविद्यालय अध्यादेश, 2018 की जगह लेगा.

राष्ट्रीय खेलकूद विश्वविद्यालय विधेयक 2017 को 10 अगस्त 2017 को लोकसभा में पेश किया गया था लेकिन यह पारित नहीं हो सका.

लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने साफ किया कि इस यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर एक खिलाड़ी होगा, जबकि एकेडमिक काउंसिल में भी खिलाडिय़ों को रखा जाएगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि यह बिल पास होने के बाद यूनिवर्सिटी के आउटलाइन कैंपस विदेशों में भी खोले जा सकते हैं। यही नहीं इसके कैंपस देश के दूसरे राज्यों में भी खोले जाएंगे, लेकिन डिग्री मणिपुर नेशनल स्पोट्र्स यूनिवर्सिटी से ही जारी की जाएगी। 

चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के सभी सांसदों ने इस यूनिवर्सिटी का समर्थन किया। हालांकि आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि इस बिल को लाने में देर की गई है। इस पर राठौड़ ने कहा कि बिल को बीते वर्ष 10 अगस्त को लोकसभा में लाया गया था। इसके बाद इसे सांसदों की स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया गया। यही कारण है कि इस बिल पर अध्यादेश लाना पड़ा और पढ़ाई शुरू कराई गई। 

अनुराग ठाकुर ने उठाए कई सवाल 

हमीरपुर से भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने इस बिल का समर्थन करते हुए कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिल में राष्ट्रीय खेल संघों को जोड़ने की व्यवस्था नहीं की गई है। खेल संघ टीमें चुनते हैं उनके जुड़ने से तालमेल बैठेगा। ठाकुर ने कहा कि यूनिवर्सिटी की कमेटी में आईओए और खेल संघ के एक-एक सदस्य को शामिल किया जाना चाहिए।

वहीं उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी के जरिए दूसरी केंद्रीय यूनिवर्सिटी में सेंटर ऑफ एक्सिलेंस खोलकर उन्हें इससे जोड़ना चाहिए। ठाकुर ने पक्ष और विपक्ष के कई सांसदों का समर्थन लेते हुए मंत्रालय से मांग की कि सांसदों को अपने क्षेत्र में खेल गतिविधियां कराने के लिए फंडिंग की जानी चाहिए। उन्होंने अपने क्षेत्र में यह प्रयास किया है। बाकी सांसदों ने भी यह कदम उठाना शुरू कर दिया है।