खेल उद्योग को जीएसटी से दोहरा झटका

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जीएसटी से खेल उद्योग को दोहरा झटका लगा है। बड़ी औद्योगिक इकाइयों के सामने जीएसटी रिफंड न मिलने से पूंजी संकट खड़ा हो रहा है। खेल का सामान बनाने वाली बड़ी कंपनियों के करोड़ों रुपये जीएसटी रिफंड में फंसे हैं। वहीं कच्चे माल और उपकरण पर अलग-अलग जीएसटी लगने से खेल उपकरणों की निर्माण लागत बढ़ी है। लागत बढ़ने से बाजार में उपकरणों की कीमतें भी बढ़ी हैं। इस कारण कई कंपनियों का निर्यात और स्थानीय व्यापार घटा है। लेबर चार्ज, निर्माण लागत घटाने और मांग कम होने से 800 से अधिक मजदूरों को निर्माता कंपनियों ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बड़ी औद्योगिक इकाइयों से निकले ये मजदूर या तो बेरोजगार हैं या कुछ ने ऋण लेकर अपना क ारखाना खोल दिया है। ये लोग सीधे टैक्स चोरी करके कम दामों पर उपकरण बेचकर बाजार खराब कर रहे हैं। जीएसटी से बड़ी इकाइयों को झटका और छोटी इकाइयों को लाभ मिला है।

महंगे खेल उपकरण, जनता पर पड़ा बोझ
जीएसटी लागू होने के बाद पिछले एक साल में खेल उपकरणों की कीमत 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ी है। सरकार ने 12, 18 और 28 प्रतिशत दर से विभिन्न खेल उपकरणों पर जीएसटी लगाया है। बल्ला, गेंद, ग्लव्ज, स्टिक, विकेट, हेलमेट, क्रिके ट किट बैग, ट्रेकसूट, रस्सी, कैरम, टेबिल टेनिस के टेबल, एथलेटिक्स उपकरणों से लेकर फिटनेस उपकरणों पर अलग-अलग दर से जीएसटी लगा है। आयटम के अलावा रॉ मटीरियल पर अलग से जीएसटी लगाया है। इससे खेल उपकरणों की निर्माण लागत बढ़ी है। इस कारण कंपनियों ने खेल उपकरणों की कीमतें बढ़ा दी हैं। इसका सीधा असर ग्राहक ों पर पड़ा है।

आय नहीं मांग में गिरावट
जीएसटी लगने से खेल निर्माता कंपनियों की आय पर असर नहीं पड़ा है। कंपनियां उपकरण की कीमत बढ़ाकर ग्राहक से जीसएटी वसूल रही हैं। कंपनी की वार्षिक आय ज्यों की त्यों है। लेकिन उपकरण महंगे होने से आम आदमी की मांग घट गई है। इसका सीधा असर रिटेल कारोबार के साथ निर्माता कंपनियों पर पड़ा है। कई बड़ी कंपनियों का ऑर्डर घटा है। 

खेल इंडस्ट्री पर जीएसटी लगने से संकट
खेल उद्योग पर जीएसटी से पहले सात प्रतिशत वैट का प्रावधान था। उद्यमियों ने प्रदेश सरकार से मिलकर खेल उद्योग को इस कर से बाहर करा लिया। 2011 में मनमोहन सिंह सरकार ने पुन: खेल उद्योग पर एक्साइज ड्यूटी लगा दी। अभी तक कारोबारी एक्साइज ड्यूटी देते थे। लेकिन अब 12 से 28 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ रहा है।


बातचीत--
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. जो कारोबारी वक्त पर टैक्स देते थे, उन्हें जीएसटी लागू होने से कोई परेशानी नहीं। लेकिन अवैध तरीके से कारोबार करने वाले जरूर प्रभावित हुए हैं। जीएसटी में बड़ी समस्या रिफंड नहीं मिलना है। उद्यमी के टर्नओवर की पांच प्रतिशत रकम जो रिफंड के नाम पर फंसी है। इससे उद्यमी परेशान हैं। -राकेश कोहली, चेयरमैन स्टैग इंटरनेशनल 
 
. जीएसटी लागू होने के बाद दिक्कत पॉजिटिव रिफंड नहीं मिलने से आ रही है। उद्यमी तय वक्त पर टैक्स भुगतान कर रहा है। लेकिन उद्यमी को उसका रिंबर्समेंट नहंी मिल रहा। रिबर्समेंट नहीं मिलने के कारण कई इकाइयां घाटे में आने लगी हैं। -अनिल सरीन, निदेशक एसएफ

. खेल उद्योग शिक्षा का एक भाग है। सरकार खेलो इंडिया को बढ़ावा दे रही है, ऐसे में खेल उपकरणों को 12 से 28 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया। कई इकाइयां घाटे में चली गई हैं। उपकरणों की लागत बढ़ी है, कई मजदूरों से उनका रोजगार भी छिना है। -राकेश महाजन, निदेशक बीडीएम