इटारसी में हॉकी का जादू बच्चों को खींच रहा है

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इटारसी। भले ही देश में क्रिकेट को सबसे बड़ा और पैसा वाला खेल माना जाता हो, लेकिन हॉकी का जादू भी कम नहीं है। इटारसी की बात करें तो हॉकी की नर्सरी के नाम से विख्यात इटारसी में हॉकी का जादू ही है जो अपनी ओर ऐसे बच्चों को भी खींच ला रहा है जिनके पास न हॉकी खरीदने के पैसे हैं और न ही जूते खरीदने के।

गांधी स्टेडियम में सीएम डे बोर्डिंग अकादमी में इस तरह की परिस्थिति वाले परिवारों के बच्चे हॉकी का हुनर सीख रहे हैं।

यहां ट्रेनिंग लेने आ रहे उभरते हुए खिलाड़ी गिरीश अहिरवार इनमें से एक हैं। गिरीश की मां घरों में झाडू लगाकर परिवार चला रही हैं। गिरीश के पास खुद की हॉकी नहीं है और व पहनने को जूते भी नहीं। प्रैटिक्स करते हैं तो जिला हॉकी संघ हॉकी प्रदान करता है। अब उन्हें सीएम अकादमी में खेल युवक कल्याण विभाग द्वारा भेजी गई किट मिल गई है, जिसे पाकर वे खुश हैं।

गिरीश अभी फ्रेंड्स स्कूल में कक्षा 8वीं के छात्र हैं। इसी तरह सेमूअल मसीह हैं, परिवारिक स्थिति अच्छी नहीं है। सेमूअल के पिता नहीं है, मामा परिवार चलाने के लिए पैसा भेजते हैं। सेमूअल गोलकीपर हैं और अभी से शानदार प्रदर्शन कर नाम कमा लिया है।

हॉकी कोच कन्हैया गुरयानी का कहना है कि ज्यादातर बच्चे गरीब व लोअर मीडिल क्लास फैमली से हैं लेकिन इनमें हॉकी खेलना का जुनून बहुत है। सभी वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी उनका होंसला बढ़ाते हैं। खासकर राजू हरदुआ। ये रोजाना अपनी नौकरी कर बच्चों की प्रैक्टिस कराते हैं, जिन बच्चों के पास हॉकी नहीं है वे उन्हें हॉकी भी उपलब्ध कराते हैं।

जिन्हें किट नहीं मिल पाई थी मिली

खेल युवक कल्याण विभाग द्वारा सीएम डे बोर्डिंग अकादमी को प्रदान की गई हॉकी किट का वितरण आज भी किया गया। कुछ दिनों पहले ये किट आई थी, जिसमें आधे खिलाड़ियों को पहले चरण में किट दे दी गई थी, अब दूसरे चरण में खिलाड़ियों को किट दी गई है।