पैरा एशियन गेम्स;रवाना हुए भारतीय एथलीट, शाहरुख खान ने बढ़ाया हौसला

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नई दिल्ली: भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) ने स्टार अभिनेता शाहरुख खान की मौजूदगी में बुधवार को खिलाड़ियों को 6 से 13 अक्टूबर तक होने वाले तीसरे एशियाई पैरा खेलों में भाग लेने के लिए रवाना किया. एशियाई पैरा खेलों में खिलाड़ी एथलेटिक्स, तैराकी, बैडमिंटन, शतरंज और पावरलिफ्टिंग स्पर्धाओं में भाग लेंगे. पीसीआई के अध्यक्ष राव इंदरजीत सिंह ने कहा, ‘‘करीब 200 एथलीट, कोच, सहयोगी स्टाफ, स्टाफ और अधिकारी 300 सदस्यीय भारतीय दल के साथ जकार्ता रवाना होंगे.’’ 

भारत की पदक की उम्मीदें पैरालंपिक पदकधारी दीपा मलिक, देवेंद्र झझारिया, मरियप्पा थांगवेलू, वरूण भाटी से लगी हैं. दीपा ने 2016 रियो पैरालंपिक में शॉटपुट में सिल्वर मेडल जीता था और वह इन खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं. उन्होंने और अन्य खिलाड़ियों ने शाहरुख को पैरा एथलीटों का अधिकारिक ब्रांड दूत बनाने की इच्छा व्यक्त की. इंचियोन पैरा एशियाई खेलों में भारत ने 33 पदक हासिल किए थे जिसमें तीन स्वर्ण, 14 रजत और 16 कांस्य पदक शामिल थे. 

शाहरुख खान की मीर फाउंडेशन पैरा एथलीटों का समर्थन करती है, उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां बहुत स्वार्थी कारणों से आया हूं, मैं जब बच्चा था तो मैं खेलों में भाग लेता था. एक दिन मुझे चोट लगी और इसके बाद मुझे एक साल तक घर में ही रहना पड़ा. ’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगा मेरी जिंदगी खत्म हो गई लेकिन जब भी इन खिलाड़ियों को देखता हूं तो मैं इनसे प्रेरणा लेता हूं. मैं यहां इनसे प्रेरित होने आया हूं और प्रेरित करने के लिये इन पैरा एथलीट का शुक्रिया.’’ 

'हम सब कहीं न कहीं अधूरे हैं'
शाहरुख खान ने भारतीय पैरालंपिक दल को पैरा एशियाई खेल 2018 के लिए बधाई देते हुए कहा कि हम सभी कहीं न कहीं अधूरे होते हैं और कमियों से लड़कर इस अधूरेपन को भरा जा सकता है. राजधानी आए 52 वर्षीय अभिनेता ने कहा कि लोगों को अपनी अपूर्णता को भरने के लिए अपनी कमजोरी से लड़ना होता है.

उन्होंने खिलाड़ियों से कहा, ‘‘हम कहीं न कहीं अधूरे होते हैं. कभी शारीरिक मामले में, कभी हम मानसिक रूप से परिपक्व नहीं हो पाते. तो कभी भावनात्मक रूप से. हम सभी में कोई न कोई कमी होती है. कहा जाता है कि भगवान ने हमें उसकी तरह बनाया है लेकिन उसके जैसा नहीं.’’ 

शाहरुख ने कहा, ‘‘उन्होंने हमें दुनिया में भेजा ताकि हम अपनी कमियों से पार पाएं और अपने जीवन को पूरा करें. नौकरी, आर्थिक स्थिरता, स्टारडम और शक्ति हमें पूरा नहीं करती. हमें अपने अधूरेपन को पूरा करने के लिए अपनी कमियों से लड़ना होगा.’’