मुंबई में गोल-गप्पे बेचता था ये बल्लेबाज

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भारतीय क्रिकेट टीम ने रविवार को श्रीलंका पर बड़ी जीत दर्ज करके छठी बार अंडर-19 एशिया कप खिताब अपने नाम किया। भारत की इस जीत में ओपनिंग बल्लेबाज यशस्वी जयसवाल ने बड़ा योगदान दिया और 85 रनों की पारी खेलकर मैच के हीरो रहे। उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले यशस्वी के लिए भारतीय टीम में जगह बनाना मुश्किल सपना था। यहां तक पहुंचने के लिए उसे मुंबई शहर में गोल-गप्पे तक बेचने पड़े। 

यशस्वी जब यूपी से मुंबई आए तो उन्हें डेयरी शॉप पर नौकरी करनी पड़ी। दशहरा मेले के दौरान मुंबई के आजाद मैदान में उसने गोल-गप्पे भी बेचे। लेकिन इसके साथ-साथ क्रिकेट की प्रैक्टिस जारी रखी। अब इसी खिलाड़ी ने भारत के लिए अंडर-19 क्रिकेट एशिया कप के फाइनल मैच में 113 गेंदों पर 85 रन की शानदार पारी खेली। इसी के दम पर भारत ने श्रीलंका को 144 रनों से मात देकर छठी बार ट्रॉफी अपने नाम की।

तीन साल तक टेंट में रहे
यशस्वी जयसवाल मुंबई के मुस्लिम यूनाइटेड क्लब के गार्ड के साथ तीन साल तक टेंट में रहे। यूं तो मुंबई में यशस्वी के चाचा रहते थे। लेकिन उनका अपना परिवार था और किराए का घर इतना बड़ा नहीं था कि वह यशस्वी को अपने साथ रख सकें। इसलिए यशस्वी को 11 साल की उम्र में ही अगले तीन सालों तक मुस्लिम यूनाइटेड क्लब के गार्ड के साथ टेंट में रहना पड़ा। उन्होंने अपने इस संघर्ष से भरे जीवन के बारे में मां-बाप को भनक तक नहीं लगने दी। क्योंकि अगर उनके परिवार को पता चलता तो उन्हें वापस भदोही बुला लिया जाता और उनके क्रिकेट करियर का वहीं अंत हो जाता। 

मालिक ने नौकरी से निकाला तो गोल-गप्पे बेचे
वैसे तो यशस्वी के बड़े भाई उन्हें पैसे भेजते थे लेकिन मुंबई जैसे शहर में उस पैसे से जीवन गुजारना नामुमकिन था। यशस्वी ने अपना खर्च चलाने के लिए एक डेयरी शॉप पर नौकरी कर ली और वहीं रहने भी लगे। लेकिन डेयरी शॉप के मालिक ने एक दिन यशस्वी को नौकरी से निकाल दिया। अपना खर्च निकालने के लिए उन्होंने मुंबई के आजाद मैदान में दशहरे के दौरान लगने वाले मेले में गोलगप्पे तक बेचे। 

सचिन ने गिफ्ट किया था अपना बल्ला 
यशस्वी और सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन एक साथ ही खेलते हैं। दोनों का एक ही साथ भारत की अंडर-19 टीम में श्रीलंका दौरे के लिए सलेक्शन हुआ था। जब यशस्वी श्रीलंका के दौरे पर जाने वाले थे तो सचिन तेंदुलकर ने उन्हें अपना बल्ला गिफ्ट किया था।