चपरासी का बेटा बना इंडिया का 'मेसी'

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मुजफ्फरनगरः मुजफ्फरनगर के रहने वाले नीशू कुमार ने अपने जिले का ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया है। नीशू कुमार ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन की वजह से भारतीय नेशनल टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है। बता दें कि फुटबॉल खिलाड़ी नीशू का चयन भारतीय टीम में डिफेंडर के रूप में हुआ है। इस सफलता ने उसके घर-परिवार और प्रदेश के नाम को चार चांद लगा दिए हैं।

पिता कॉलेज में थे चपरासी
जानकारी के मुताबिक नीशू एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है। नीशू के पिता एक कॉलेज में चपरासी थे। गरीबी और असुविधाओं के बावजूद नीशू ने फुटबॉल के प्रति अपने जुनून को कम नहीं होने दिया। नीशू का कहना है कि, 'उसने 5 साल की उम्र से ही फुटबॉल खेलना शुरू किया था। इसके बाद स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर की देख-रेख में उन्होंने प्रैक्टिस की।' आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनने की वजह से वह गर्व महसूस कर रहे हैं।

भारत की अंडर 15 और अंडर 16 टीम में भी खेल चुके
नीशू भारत की अंडर 15 और अंडर 16 टीम के सदस्य के रूप में विश्व के कई देशों में फुटबॉल खेल चुके हैं। उन्होंने इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, जापान, यूरोप, खाड़ी और रशियन देशों में भी फुटबॉल खेला है। 2017 में नीशू का चयन नेशनल टीम में हुआ था।

नेपाल से आकर बसे मुजफ्फरनगर में 
नीशू ने बताया कि उसका परिवार करीब 50 साल पहले नेपाल से यहां आकर बस गया था। नीशू के घरवाले बताते हैं कि उसे बचपन से ही फुटबॉल खेलने का शौक था। नेशनल टीम में शामिल होने के लिए उसने बहुत मेहनत की है। नीशू ने 2009 में चंडीगढ़ फुटबॉल एकेडमी से अपने करियर की शुरुआत की थी। 2010 में चंडीगढ़ एकेडमी की तरफ से उन्होंने पहली बार विदेश का दौरा किया। उन्होंने एकेडमी टीम का बतौर कप्तान प्रतिनिधित्व किया।