जब जूते न होने की वजह से फीफा वर्ल्ड कप नहीं खेल पाया भारत

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भारत में होने जा रहे फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप का इंतजार अब ख़त्म होने को है. इस विश्व कप का आगाज कल से दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में होने जा रहा है. बता दें कि, यह पहली बार है जब फीफा के किसी टूर्नामेंट का आयोजन भारत में हो रहा है. इस टूर्नामेंट में विश्वभर की कुल 24 टीमें हिस्सा लेंगी. इस दौरान कुल 52 मैच खेले जायेंगे. अंडर-17 विश्व कप का फ़ाइनल मैच 28 अक्टूबर को कोलकाता में खेला जाएगा. आप में से बहुत ही कम लोग जानते होंगे कि, एक समय ऐसा भी था जब फीफा विश्व कप में भारत की तोती बोलती थी.

साल 1950 के फीफा विश्व कप में भारत ने बड़ी आसानी से क्वालीफाई कर लिया था लेकिन बावजूद इसके भारतीय टीम एक भी मैच नहीं खेल पायी थी. इस बारे में एक किस्सा भी काफी फेमस है कि, जब 1950 के फीफा वर्ल्ड कप में भारतीय टीम हिस्सा लेने पहुंची तो उसके पास खेलने के लिए खुद के जूते भी नहीं थे. इस कारण से खिलाड़ियों ने खेलने से मना कर दिया था. हालांकि यह पहला मामला नहीं था जब आजाद भारत के खिलाड़ियों को ऐसी हालत से गुजरना पड़ा था.

साल 1948 के ओलम्पिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने कमाल का प्रदर्शन कर दुनियाभर को अपनी प्रतिभा से रूबरू कराया था लेकिन इस दौरान भी कई खिलाडी ऐसे थे जिन्होंने नंगे पाव या सिर्फ मोज़े पहनकर ही पूरा टूर्नामेंट खेला था. लेकिन अब भारत में फुटबॉल का यह महाकुम्भ शुरू होने जा रहा है. उम्मीद है कि इस अंतर्राष्ट्रीय आयोजन के बाद भारत में फूटबाल जैसे खेलों को और बढ़ावा मिल सकेगा.

भारत की मेजबानी में होने वाले पहले अंडर-17 वर्ल्ड कप फुटबॉल में कई अनूठे रिकॉर्ड बनेंगे। इतिहास में यह पहला मौका होगा जब टीमें रिकॉर्ड दूरियां तय करेंगी।दो मेजबान शहरों कोच्चि और गुवाहाटी अब तक के इतिहास में सबसे दूरी वाले आयोजन स्थल होंगे। वहीं इसके अलावा कई और रिकॉर्ड हैं जो इस टूर्नामेंट में बनेंगे। नजर डालिए इन रिकॉर्ड्स पर

सबसे लंबी दूरी
कोच्चि के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम और गुवाहाटी स्थित इंदिरा गांधी स्टेडियम के बीच की हवाई दूरी 2,431 किलोमीटर है, जबकि सड़क मार्ग से यह दूरी 3,300 किमी है। यह 1985 से शुरू हुए टूर्नामेंट के दो स्थलों के बीच दूरी का रिकॉर्ड है। 


सबसे बड़े मैदान 
फाइनल कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ागन में खेला जाएगा, जो टूर्नामेंट का सबसे बड़ा मैदान है। इसकी क्षमता 66,600 दर्शकों की है। दूसरा स्टेडियम कोच्चि का होगा, जिसकी क्षमता 60,000 है। इतिहास का सबसे बड़ा मैदान मैक्सिको का एस्टाडियो रहा। 2011 के मेजबान देश और उरुग्वे के बीच फाइनल मैच में 98,943 दर्शक जुटे।