इन नियमों से खेला जाता है फुटबॉल

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नई दिल्ली रूस में फुटबॉल वर्ल्ड कप शुरू हो चुका है और अब सभी टीमें टूर्नमेंट के दूसरे राउंड में क्वॉलिफाइ करने के लेकर जोर लगा रही हैं। ऐसे में फुटबॉल फीवर के रोमांच का थर्मामीटर और ऊपर चढ़ रहा है। जानते हैं, फुटबॉल से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां:- 

दोनों टीमों के 11-11 खिलाड़ी अपने गोल पोस्ट पर गोल को बचाने का और विरोधी टीम के गोल पोस्ट को भेदने का प्रयास करते हैं। 90 मिनट के इस खेल में 45-45 मिनट के 2 हाफ होते हैं। इन दोनों हाफ में कुछ एक्स्ट्रा टाइम भी निकलता है, जो मैच के दौरान खिलाड़ियों के चोटिल होने, खिलाड़ी सब्सीट्यूशन के बीच खेल रुकने का समय या अन्य किसी वजह से मैच में बर्बाद हुए समय को ध्यान में रखकर निकाला जाता है। 

रेफरी: खेल के मैदार पर रेफरी ही सर्वोच्च अथॉरिटी है और उसके हर शब्द नियम हैं। अगर खिलाड़ी रेफरी के निर्णय से संतुष्ट नहीं होते, तो उनके कार्रवाई हो सकती है। 

सहायक रेफरी: सहायक रेफरी मैच के रेफरी को उसके काम में मदद करता है। बॉल के मैदान से बाहर जाने पर, खिलाड़ी के फाउल करने पर या फिर खिलाड़ी के ऑफसाइड पोजिशन होने पर फ्लैग दिखाना। 

खेल शुरू और दोबारा शुरू: खेल शुरू होने का निर्णय टॉस के जरिए होता है, इसमें टॉस जीतने वाला कप्तान यह तय करता है कि उसकी टीम गोल पोस्ट पर अटैक करना चाहती है या फिर बॉल को किक ऑफ (किक मारना) करना चाहती है। मैच में प्रत्येक गोल के बाद बॉल को सेंटर लाइन पर रखकर दोबारा खेल शुरू होता है। अगर कोई टीम गोल करती है, तो फिर विरोधी टीम को बॉल को किक ऑफ करने के लिए मिलती है। इसी तरह हाफ टाइम के बाद भी सेंटर लाइन से ही खेल दोबार शुरू होता है। 

स्ट्राइकर: मुख्य काम गोल मारना होता है। 

डिफेंडर्स: खासतौर पर अपने विरोधियों को गोल स्कोर करने से रोकता है। 

मिडफिल्डर्स: विपक्षियों से बॉल छीन कर अपने आगे खेलने वाले प्लेयर्स को बॉल देने का काम करता है। 

मैनेजर या कोच: रणनीति बनाने में अहम रोल निभाता है। 

गोलकीपर: गोल कीपर इकलौता ऐसा खिलाड़ी होता है, जिसे अपने हाथ या बांह में बॉल पकड़ कर खेलने की इजाजत होती है, लेकिन वह अपने गोल के सामने पेनल्टी एरिया तक ही ऐसा कर सकता है। 

मैदान की लंबाई: 100-110 मीटर 

पिच की चौड़ाई: 64-75 मीटर 

पेनल्टी कॉर्नर: हर गोल के सामने का एरिया पेनल्टी एरिया के रूप में जाना जाता है। यह एरिया सर्किल लाइन से पहचाना जा सकता है। यह गोल पोस्ट से 16.5 मीटर की दूरी तक होता है। 

पेनल्टी किक: गोलकीपर की पॉजिशन या डिफेंस करने वाली टीम अगर फॉउल करती है तो सजा के तौर पर पेनल्टी दी जाती है। 

टाइम: मैच 90 मिनट का होता है, जिसमें 45-45 मिनट के दो हिस्से होते हैं। 

किक-ऑफ: गेम टाइम की शुरुआत किक मारने (kick-off) के साथ होती है। 

पेनल्टी शूटआउट: लीग गेम्स में खेल ड्रॉ के साथ खत्म हो सकता है, लेकिन कुछ नॉक आउट गेम्स में अगर खेल तय समय तक टाई रहा तो वह मैच एक्स्ट्रा टाइम तक चल सकता है। अगर एक्स्ट्रा टाइम के बाद भी टाई रहता है तो पेनल्टी शूटआउट (नियम के मुताबिक पेनल्टी पॉइंट से किक मारना कहा जाता है) का प्रयोग किया जाता है। 

थ्रो-इन: जब बॉल पूरी तरह से रेखा पार कर जाती है, तब उस विरोधी टीम को इनाम मिलता है, जो बॉल आखिरी बार छूता है। 

गोल किक: जब बॉल पूरी तरह गोल रेखा को पार कर जाती है तो गोल के बिना ही स्कोर होता है और अटैकर द्वारा बॉल को आखिरी बार छूने के कारण डिफेंस करने वाली टीम को इनाम मिलता है। 

कॉर्नर किक: जब बॉल बिना गोल के ही गोल रेखा को पार कर जाती है और डिफेंस करने वाली टीम द्वारा बॉल को आखिरी बार छूने के कारण हमलावर टीम को इनाम में मिलता है। 

इनडायरेक्ट फ्री किक: यह विरोधी टीम को इनाम में मिलती है, जब बिना किसी विशेष फाउल के बॉल को बाहर भेज दिया जाए और खेल रुक जाए। 

ड्रॉप-बॉल: जब रेफरी किसी दूसरी वजह से गेम को रोक दे, जैसे प्लेयर को गंभीर चोट लगना या बॉल का खराब हो जाना। 

येलो कार्ड: रेफरी प्लेयर को पनिशमेंट के रूप में उसके गलत बर्ताव के लिए Yellow Card दिखाकर मैदान के बाहर भेज सकता है। 

रेड कार्ड: एक ही खेल में दूसरी बार पीला कार्ड मिलने का मतलब है रेड कार्ड का मिलना और उसके बाद मैदान से बाहर। अगर एक प्लेयर को बाहर निकाल दिया जाता है तो उसकी जगह कोई दूसरा प्लेयर नहीं आ सकता। 

ऑफसाइड: ऑफ साइड नियम में आगे के प्लेयर बॉल के बिना बचाव करते दूसरे प्लेयर के आगे नहीं जा सकते, खासकर विरोधी टीम की गोल रेखा के एकदम पास।