जब सचिन को पूरी दुनिया के सामने कहा गया 'बेईमान'

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नई दिल्ली. क्रिकेट का भगवान...ये संज्ञा सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) को सिर्फ 100 शतक लगाने के लिए नहीं मिली है. सचिन ने ये नाम अपनी ईमानदारी की वजह से भी कमाया है. अपने दो दशक के करियर में सचिन तेंदुलकर ने कई बड़े-बड़े रिकॉर्ड बनाए और तोड़े लेकिन एक मैच ऐसा भी आया जब उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश हुई, जब सचिन की प्रतिष्ठा को तोड़ने की कोशिश हुई, जब सचिन को 'बेईमान' बताकर उन्हें बैन कर दिया गया. आइए आपको बताते हैं उस घटना के बारे में जिसे भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े विवादों में गिना जाता है.

सचिन तेंदुलकर पर लगा था गेंद से छेड़छाड़ का आरोप
साल 2001, पोर्ट एलिजाबेथ का मैदान और भारत-साउथ अफ्रीका के बीच चल रहे दूसरे टेस्ट का तीसरा दिन. सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) गेंदबाजी करने आए और उनकी गेंद बहुत ज्यादा स्विंग होने लगी. जिस पिच पर दूसरे गेंदबाज स्विंग कराने में नाकाम हो रहे थे, वहां सचिन की गेंद इतनी ज्यादा कैसे घूम रही है, बस यही जानने के लिए स्थानीय टीवी प्रोड्यूसर ने कैमरामैन को निर्देश दिया कि वो सचिन की उंगलियों पर फोकस करे. अचानक सचिन की दो तस्वीरें टीवी पर दिखाई जाने लगी जिसमें वो अपने अंगूठे और बाएं हाथ की उंगली से गेंद की सीम साफ कर रहे थे. ये तस्वीरें बार-बार दिखाई जाने लगी और देखते ही देखते सचिन तेंदुलकर पर गेंद से छेड़छाड़ (Sachin Tendulkar Ball Tampering) का आरोप लग गया.

मैच रेफरी माइक डेनिस ने बनाया सचिन को निशाना!
पोर्ट एलिजाबेथ टेस्ट के मैच रेफरी इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक डेनिस थे. सचिन (Sachin Tendulkar Ball Tampering) की गेंद को साफ करने वाले वीडियो उन्होंने अपने पास मंगवाई और उन्होंने सचिन पर गेंद से छेड़छाड़ का आरोप तय कर दिया. डेनिस ने सचिन पर एक मैच का बैन लगाया और उनकी 75 फीसदी मैच फीस भी काट ली. अब यहां दिलचस्प बात ये है कि मैदानी अंपायरों ने सचिन की शिकायत नहीं की थी. किसी अंपायर को नहीं लगा कि गेंद से छेड़छाड़ हुई है लेकिन मैच रेफरी डेनिस ने सिर्फ टीवी फुटेज देख फैसला ले लिया.
इसके बाद मैच रेफरी डेनिस ने सचिन को आरोपों पर सुनवाई के लिए बुलाया. सचिन ने गेंद से छेड़छाड़ के आरोपों को मानने से साफ इनकार कर दिया. सचिन ने सुनवाई के दौरान माना कि वो सीम साफ कर रहे थे और वो अंपायर को बताना भूल गए. सचिन ने मैच रेफरी को कहा कि आप अंपायरों से बात कीजिए कि क्या गेंद से छेड़छाड़ हुई लेकिन रेफरी डेनिस ने सचिन की बात नहीं सुनी और उनपर बैन लगा दिया.


सचिन पर बैन के बाद भड़की विरोध की आग
सचिन (Sachin Tendulkar Ball Tampering) पर बैन लगाने की खबर जैसे ही मीडिया में आई, उनके करोड़ों प्रशंसक भड़क गए. चारों ओर आईसीसी और उसके मैच रेफरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होने लगे. इस बीच सचिन ने बीसीसीआई से इसकी शिकायत की और बोर्ड ने अपने दिग्गज खिलाड़ी का पूरा साथ दिया. बीसीसीआई ने मैच रेफरी के फैसले को एकतरफा बताया और आईसीसी से अपील कर डाली कि वो तुरंत डेनिस को अगले टेस्ट मैच से बतौर मैच रैफरी बाहर करे. आईसीसी ने इससे इनकार कर दिया, इसके बाद बीसीसीआई ने तीसरा टेस्ट ना खेलने की चेतावनी दे डाली. आईसीसी ने इसके बावजूद डेनिस को हटाने से मना कर दिया.

आईसीसी और बीसीसीआई की तकरार के बीच साउथ अफ्रीका क्रिकेट बोर्ड ने मामला सुलझाने की कोशिश की. साउथ अफ्रीका बोर्ड ने माइक डेनिस से हटने को कहा लेकिन वो माने नहीं. डेनिस के इनकार के बाद साउथ अफ्रीका बोर्ड ने मीडिया में ऐलान किया कि तीसरे टेस्ट में डेनिस की जगह डेनिस लिनसे मैच रेफरी होंगे. आईसीसी को साउथ अफ्रीका बोर्ड का ये फैसला कतई पसंद नहीं आया और उसने तीसरे टेस्ट को अमान्य घोषित करने का ऐलान कर दिया. आईसीसी ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी मेजबान देश अपनी मर्जी से आईसीसी का मैच रेफरी नहीं बदल सकता है.

आईसीसी को वापस लेना पड़ा फैसला
इस दौरान आईसीसी के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन होते रहे और फिर उसने बैकफुट पर आकर सचिन (Sachin Tendulkar Ball Tampering) से बैन हटाने का फैसला कर लिया. बता दें डेनिस ने सचिन के अलावा, शिवसुंदर दास, दीप दासगुप्ता, सौरव गांगुली, वीरेंद्र सहवाग और हरभजन सिंह को भी एक-एक मैच के लिए बैन किया था. इनपर अत्याधिक अपील करने का आरोप था. गांगुली पर अपनी टीम को ठीक से ना संभालने का आरोप था. सहवाग पर मैदानी अंपायरों को गाली देने का आरोप लगा था. आईसीसी ने सहवाग के अलावा दूसरे सभी खिलाड़ियों पर लगा बैन वापस ले लिया. सहवाग की शिकायत खुद अंपायरों ने की थी इसलिए उनका बैन कायम रहा.

गेंद से छेड़छाड़ प्रकरण पर सचिन की प्रतिक्रिया
सचिन (Sachin Tendulkar Ball Tampering) ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में बॉल टेंपरिंग मामले का जिक्र किया है. सचिन ने उसमें लिखा, 'मैच रेफरी डेनिस ने मुझपर जो गेंद से छेड़छाड़ के आरोप लगाए उससे मैं बहुत हैरान हो गया था, मैंने पूरी जिंदगी क्रिकेट को ईमानदारी के साथ खेला है और मैं कभी ऐसी हरकत नहीं कर सकता. मेरे खिलाफ किसी अंपायर ने शिकायत नहीं की लेकिन इसके बावजूद मुझपर बेईमान का लेबल चिपका दिया गया. मैं साउथ अफ्रीका दौरा छोड़ने के लिए भी तैयार था लेकिन बेईमान कहलाया जाना मुझे बिलकुल मंजूर नहीं था. ये मेरे स्वाभिमान की बात थी.'