खेल सामग्री पर लगे टैक्स ने बिगाड़ा खिलाड़ियों का खेल

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मैं संदीप कुमार अर्थला की इंदिराकुंज कॉलोनी में परिवार के साथ रहता हूं। मेरे पिता ब्रेड सप्लाई का काम करते हैं और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन पर ही है। मैं क्रिक्रेट का प्लेयर हूं, मेरी योग्यता को देखते अकैडमी की ओर से फीस माफ की गई है। मैंने पार्ट टाइम काम करके पिछले साल करीब 6 हजार रुपए जोड़े थे, लेकिन तभी जीएसटी लग गया। जीएसटी लगने से खेल सामग्री पर टैक्स लग गया। इस कारण क्रिकेट किट मेरी पहुंच से दूर हो गई। मैं उम्मीद करता हूं कि इस बार बजट में खेल के सामान पर टैक्स को कम किया जाए या फिर बिल्कुल ना के बराबर रखा जाए, ताकि खेल प्रतिभाएं सामने आ सकें।

कम की जाएं टैक्स दरें

स्पोर्ट्स गुड्स के होलसेलर अरुण कुमार ने बताया कि खेल के सामान पर जीएसटी को तीन भागों में बांटा गया है। उन्होंने बताया कि जीएसटी के शुरुआती दौर में यह 5, 12, 15, 18 और 28 प्रतिशत थी, लेकिन व्यापारियों की मांग को देखते हुए सरकार इन दरों में संशोधन करते हुए इन्हें 5, 12 और 18 प्रतिशत कर दिया। उनका कहना है कि सरकार को स्पोर्ट्स वियर पर 5% टैक्स को पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए। इसके साथ ही टॉय, ट्राईसाइकल, स्कूटर, पैडल कार जैसे अन्य गुड्स पर 12-18% तक टैक्स लगाया गया है, जिसे कम करते हुए 12 प्रतिशत कर दिया जाए। इसके साथ ही उनका कहना है कि खेल सामग्री पर 12 प्रतिशत से अधिक टैक्स ना लगाया जाए, जिससे व्यापारी और खिलाड़ी दोनों को ही राहत मिलेगी।

1700 करोड़ के नुकसान का अनुमान

टैक्स एक्सपर्ट मयंक गोयल का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद से सभी प्रकार के व्यापार में काफी गिरावट देखी गई है। चौतरफा विरोध के बाद सरकार ने जीएसटी दरों को रिफॉर्म कर व्यापारियों को राहत देने का प्रयास किया है। उनके अनुसार पहले जिन स्पोर्ट्स आइट्म्स पर 12, 15 और 18% टैक्स लगाया गया था, उसे सिर्फ 12% पर लाया गया है, जबकि 28% के प्रावधान को खत्म कर उसे 18% पर लाया गया है। उन्होंने दावा किया है कि जीएसटी आने के बाद से जालंधर की स्पोर्ट्स मार्केट को करीब 1700 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि स्पोर्ट्स वियरिंग आइटम्स पर 5% टैक्स को खत्म कर देना चाहिए, जबकि टेबल टेनिस, क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी और जिमनास्ट, स्विमिंग और चेस गेम्स पर लगने वाले 12% टैक्स को कम कर 5% पर लाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा जहां सरकार खेलो इंडिया खेलो के तहत युवाओं को प्रोत्साहित कर रही है, वहीं टैक्स दरों में गिरावट करने से निश्चित ही उन्हें लाभ मिलेगा।

पी-टॉक

क्रिकेट के सामान पर काफी ज्यादा टैक्स लगाया गया है। इस बार बजट से उम्मीद है कि क्रिकेट किट से लेकर अन्य सामान पर टैक्स दरों को कम किया जाएगा, ताकि खिलाड़ी अच्छी तकनीक का सामान सस्ते दामों पर खरीद सकेगा।

सुमित प्रताप सिंह, क्रिकेट खिलाड़ी

प्रतिभा निखारने के लिए सरकार को खेल जगत से टैक्स सिस्टम खत्म करना चाहिए। चूंकि, सरकार जिस प्रकार खेल को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है, जीएसटी उसे उतनी ही तेजी से रोक रहा है। खेल सामग्री को पूरी तरह टैक्स फ्री रखना चाहिए।

दिलीप उपाध्याय- क्रिकेट कोच

मैं स्पोर्ट्स में काफी दिलचस्पी रखता हूं। हर साल स्पोर्ट्स इक्यूपमेंट खरीदता हूं। मगर जीएसटी लगने के बाद से सामान महंगा हो गया है। बजट में 12 और 18% टैक्स को कम कर देना चाहिए।

कुलदीप, खिलाड़ी