पूर्व भारतीय फुटबॉल कप्तान खिला रहे हैं प्रवासी मजदूरों को खाना

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नई दिल्ली फिल्मों में काम करने से लेकर प्रवासियों के लिए खाना बनाने तक, आईएम विजयन हर काम आसानी से करते हैं। आप उनसे इस बारे में पूछें तो वह अपने चिर-परिचित अंदाज में उसे हंसकर टाल देते हैं।90 के दशक के फुटबॉल प्रशंसक इस बात से बखूबी वाकिफ होंगे। बंदिशें कभी विजयन को ज्यादा बांध नहीं पाईं। पूर्व भारतीय कप्तान फिलहाल त्रिचूर में हैं। वह यहीं पैदा हुए और फुटबॉल का ककहरा भी इन्होंने यहीं सीखा। केरल पुलिस के जवान के रूप में अब वह अपना फर्ज भी यहीं अदा कर रहे हैं।

जब उन्हें पता चला कि उनके आसपास में करीब 50 प्रवासी मजदूर, जिनमें से अधिकतर बंगाल के हैं, फंस गए हैं, विजयन ने उन्हें डिनर पहुंचाने की सोची। विजयन ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'हालांकि राज्य सरकार ने उनके लिए भोजन का प्रबंध किया है, लेकिन मैंने और मेरे कुछ दोस्तों ने उन्हें रात का खाना पहुंचाने का फैसला किया। '

विजयन आटा गूंथने और रोटी बनाने का हुनर भी जानते हैं। अपने चार दोस्तों की मदद से विजयन हर रात 50 से अधिक लोगों के लिए खाना तैयार कर रहे हैं और उसे भेज रहे हैं।

विजयन ने हंसते हुए कहा, 'मेरे एक दोस्त ने अपनी रसोई दे दी है। हम वहीं बना रहे हैं। हम मैन्यू में बदलाव की कोशिश करते हैं। लेकिन आपको तो पता है कि इस मामले में हमारे हुनर जरा कम है।'

उन्होंने कहा, 'हमने सोचा कि इतने लोग यहां फंसे हुए हैं, अपने घरों से दूर। हालांकि सरकार उन्हें सब कुछ पहुंचा रही है लेकिन हमने भी मदद करने की सोची।'