धनराज पिल्लै ने बदल दिया भारतीय हॉकी का चेहरा

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नई दिल्ली: भारत के धुरंधर हॉकी खिलाड़ी धनराज पिल्लै हॉकी का कपिल देव भी कहा जाता है. धनराज की गिनती ऐसे खिलाड़यों में होती है जो केवर खेल के लिए जीते हैं. उन्होंने शुरूआत में लकड़ी के डंडों को स्टिक बनाकर हॉकी खेलना शुरू किया था. बाद में टूटी हॉकी स्टिक और फेंकी हुई बॉल से हॉकी खेला करते थे. बाद में वह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान बने और उनके नेतृत्व में भारतीय हॉकी नई बुलंदियों पर पहुंची. पुणे स्थित खिड़की में 16 जुलाई 1968 को धनराज पिल्लै का जन्म हुआ. परिवार की आर्थिक स्थिती बेहतर नहीं थी. पिता ग्राउंड्समैन थे और परिवार भी काफी बड़ा था. धनराज के पांच भाईयों वाले परिवार में सबका पालन-पोषण करना किसी चुनौती से कम नहीं था. मां हमेशा से ही पिल्लै को खेल के लिए प्रोत्साहित करती थी. 

टूटी हुई लकड़ी से खेलना सीखा

शुरू में धनराज ने टूटी हुई लकड़ियों और हॉकी की फेंकी हुई गेंदों से खेलना सीखा. वो हमेशा महान फॉरवर्ड खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद की तरह खेलने की कोशिश करते थे. धनराज मोहम्मद शाहिद को अपना आदर्श मानते हैं.

चार ओलंपिक खेलने वाले एक मात्र खिलाड़ी

इस दौरान अंतरराष्ट्रीय हॉकी में धनराज पिल्लै की शुरुआत 1989 में नई दिल्ली में आयोजित एल्विन एशिया कप में बतौर कप्तान हुई. धनराज एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने चार ओलम्पिक में हिस्सा लिया. उन्होंने 1992, 1996, 2000 और 2004 के ओलपिंक में अपने खेल का प्रदर्शन किया. वहीं 1990, 1994, 1998, और 2002 में उन्होंने एशियन गेम्स खेलें.

खेल रत्न से सम्मानित

उनकी कप्तानी में भारत ने 1998 में और 2003 में एशियन गेम्स और एशिया कप जीता. वहीं साल 1999-2000 में उन्हें खेल के सबसे बड़े पुरस्कार द राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित किया गया. इसके बाद उन्हें 2001 में पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया. वहीं 2002 में चैंपियंस ट्रॉफी में मैन ऑफ द सीरीज रहे और 2004 में उन्होंने हॉकी को आधिकारिक रूप से अलविदा कहा.

कड़क अंदाज और विवाद

 धनराज अपने खेल के अलावा अपने कड़क अंदाज और गुस्से के चलते भी सुर्खियों में रहे हैं. हॉकी प्रबंधन के खिलाफ भी वह कई बार अपना रोष प्रकट कर चुके हैं. साल 1998 में पाकिस्तान के खिलाफ श्रृंखला से पहले उन्होंने विदेशी दौरों पर टीम को कम फीस दिए जाने का विरोध किया था. जिसके बाद प्रबंधन और उनके बीच तीखी नोक-झोंक भी हुई थी.वर्तमान में धनराज भारतीय हॉकी टीम के प्रबंधक हैं. इसके अलावा वे कंवर पाल सिंह गिल के निलंबन के बाद निर्मित भारतीय हॉकी फेडरेशन की अनौपचारिक (एडहॉक) समिति के सदस्य भी चुने गए हैं.