दिल्ली के सरकारी स्कूल में अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम

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नई दिल्लीः दिल्ली के सरकारी स्कूल में बने स्टेडियम की चर्चाएं कई जगह हैं. इस स्टेडियम की खास बात ये है कि इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाया गया है. किसी सरकारी स्कूल में बना इस स्तर का ये पहला स्टेडियम है. दिल्ली के मटियाला विधानसभा के घुम्मनहेड़ा गांव के बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल में इस स्टेडियम को बनाया गया है. 24 जून को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसका उद्घाटन किया था. घुम्मनहेड़ा के बलजीत जो खुद भी राष्ट्रीय स्तर के हॉकी प्लेयर रह चुके हैं. फिलहाल बलजीत यहां बच्चों के कोच हैं. बलजीत वो समय याद कर रहे हैं जब यहां वो मिट्टी के ग्राउंड पर खेलते थे. लिहाजा सरकारी स्कूल में बने ऐसे स्टेडियम को वो सरकार की बड़ी उपलब्धि मानते हैं. बलजीत का कहना है पहले यहां 20 से 30 बच्चे खेलते थे. जब से बना ग्राउंड बना है लगभग 100 बच्चे अभ्यास के लिए आते हैं. बलजीत पिछले 4-5 सालों से इसको बनवाने के लिए लगे हुए थे. ये स्टेडियम अभ्यास के लिए निशुल्क रखा गया है.

प्रियंका घुम्मनहेड़ा की रहने वाली हॉकी प्लेयर हैं और भारत के लिये खेलना चाहती हैं. प्रियंका कहती हैं कि इससे बहुत फायदा होगा. बड़े स्टेडियम बहुत दूर हैं. पहले मिट्टी का ग्राउंड होता था अब खुश हैं कि हमें बहुत प्रोत्साहन मिलेगा. घुम्मनहेड़ा गांव के ही रहने वाले हिमांशु भी 4 साल से हॉकी खेल रहे हैं. हिमांशु कहते हैं कि पहले शिवाजी स्टेडियम या नेशनल स्टेडियम में खेलने जाते थे जिसमें दो से ढाई घंटे का वक़्त लगता था अब वो समय प्रैक्टिस में दे पाएंगे. हिमांशु कहते हैं कि देश की तरफ से खेलने का सपना है.

ये स्टेडियम कितना खास है इसे जानने के लिए हमने इस स्टेडियम के कांट्रेक्टर रहे धर्मेंद्र चड्ढा से बात की. धर्मेंद्र इससे पहले 16-17 अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम तैयार कर चुके हैं. धर्मेंद्र बताते हैं कि हमे 9 महीने का समय मिला था जिसे हमने 11 महीने में तैयार कर दिया. धर्मेंद्र कहते हैं दक्षिणी राज्यों में ज़रूर ऐसे स्टेडियम हैं लेकिन उत्तर भारत मे पहली बार है कि इस स्तर का स्टेडियम किसी सरकारी स्कूल में बनाया गया है. करीब 7 करोड़ के बजट से स्टेडियम और लाइट आदि लगाकर 10 करोड़ का खर्चा इसमें आएगा. धर्मेंद्र बताते हैं कि ये स्टेडियम फेडरेशन ऑफ़ इंटरनेशनल (FIH) से प्रमाणित है और यहां पर कोई अंतर्राष्ट्रीय मैच आयोजित करवाया जा सकता है.

अंतर्राष्ट्रीय मानक पर तैयार किये गए इस स्टेडियम में हॉकी प्लेयर्स के लिए कैम्प भी बनवाया जा रहा है ताकि खिलाड़ी यहां ठहर भी सकें. हॉकी स्टेडियम में पानी की ज़रूरत होती है. मटियाला इलाके का पानी स्टेडियम में छिड़काव के अनुकूल नही है लिहाजा वाटर प्यूरीफायर भी लगवाया गया जिसपर 30 लाख का खर्चा आया है. साथ ही प्रैक्टिस के लिये मैदान से सटा एक और छोटा स्टेडियम बनाया गया है. जो 6 A साइड का है यानि 6 खिलाड़ी खेल सकते हैं. दिल्ली सरकार के इस कदम से निश्चित रूप से खेल में मज़बूती मिलेगी.