रूस पर प्रतिबंध,ओलंपिक में नहीं ले सकेगा भाग

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विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) ने रूस को सभी बड़े खेल आयोजनों में हिस्सा लेने से चार साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है जिसमें अगले साल जापान की राजधानी में होने वाले टोक्यो ओलम्पिक-2020 और कतर में होने वाला फीफा विश्व कप-2022 शामिल हैं. इस फैसले के बाद से रूस का झंडा और राष्ट्रगान किसी भी बड़े खेल आयोजनों में नहीं होगा. हालांकि जो खिलाड़ी यह साबित करने में सफल रहेंगे कि वह डोपिंग में शामिल नहीं हैं वे तटस्थ झंडे तले खेलों में हिस्सा ले सकेंगे.यह फैसला रूस की डोपिंग रोधी एजेंसी (रुसाडा) की प्रयोगशालाओं द्वारा इसी साल जनवरी में दिए गए डाटा को अयोग्य करार दिए जाने के बाद लिया गया है. वाडा के प्रवक्ता जेम्स फिट्जगेराल्ड ने कहा, ‘सिफारिशों की पूरी सूची सर्वसम्मति से स्वीकार कर ली गयी है. वाडा कार्यकारी समिति ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया कि रूसी डोपिंगरोधी एजेंसी ने चार साल तक नियमों का पालन नहीं किया.’इस फैसले का मतलब होगा कि रूसी खिलाड़ी टोक्यो ओलंपिक में तटस्थ खिलाड़ी के तौर पर भाग ले सकते हैं लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जबकि वे यह साबित करेंगे कि वे डोपिंग की उस व्यवस्था का हिस्सा नहीं थे, जिसे वाडा सरकार प्रायोजित मानता है. फिट्जगेराल्ड ने कहा, ‘उन्हें यह साबित करना होगा कि वे रूसी डोपिंग कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थे जैसा कि मैकलारेन रिपोर्ट में कहा गया है या उनके नमूनों में हेराफेरी नहीं की गई थी.’यह फैसला रूस की डोपिंग रोधी एजेंसी (रुसाडा) की प्रयोगशालाओं द्वारा इसी साल जनवरी में दिए गए डाटा को अयोग्य करार दिए जाने के बाद लिया गया है. रुसाडा के पास अब इस फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 21 दिनों का समय है और अगर वह अपील करते हैं तो इस अपील को खेल पंचाट न्यायालय (सीएएस) में भेजा जाएगा. वाडा की उपाध्यक्ष लिंडा हेलेलैंड ने कहा कि चार साल का प्रतिबंध काफी नहीं है.प्रतिबंध पर राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. पुतिन ने इस फैसले को राजनीति से प्रेरित और ओलंपिक चार्टर के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा ,‘रूसी ओलंपिक समिति की अवहेलना करने का कोई कारण नहीं है. रूस अपने झंडे तले खेलों में भाग लेगा.’ रूस के प्रधानमंत्री दमित्री मेदवेदेव ने कहा, ‘यह रूस विरोधी उन्माद का सिलसिला है और अब यह नासूर बन चुका है.'