अरुण जेटली के निधन पर क्रिकेट जगत ने दी श्रद्धांजलि

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भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का शनिवार को 66 साल की उम्र में निधन हो गया है। जेटली ने दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर दिल्ली के एम्स में आखिरी सांस ली। वह पिछले कई दिनों से बीमार थे जिसकी वजह से उनका 9 अगस्त से एम्स में इलाज चल रहा था।राजनेता के तौर जेटली ने भारतीय राजनीति में कई दशक बिताए और इस दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। इसके अलावा उनका क्रिकेट से भी काफी जुड़ाव रहा है। जेटली के निधन पर क्रिकेट जगत की कई बड़ी हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटटेर आकाश चोपड़ा ने ट्विटर पर जेटली के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने लिखा, "यह सुनकर दुख हुआ कि श्री अरुण जेटली अब नहीं रहे। एक विद्वान ... एक क्रिकेट प्रेमी। हमेशा मददगार। उन्हें अंडर -19 स्तर पर भी अच्छा प्रदर्शन करने वाले बच्चों के नाम याद होंगे।"पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने भी जेटली के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सहवाग ने ट्वीट करते हुए लिखा, "अरुण जेटली जी के निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ। सार्वजनिक जीवन में सेवा करने के अलावा, उन्होंने दिल्ली के कई खिलाड़ियों को टीम इंडिया तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। एक समय था जब दिल्ली के कई खिलाड़ियों को बड़े स्तर पर मौका नहीं मिलता था।"सहवाग ने आगे लिखा, "उन्होंने खिलाड़ियों की जरूरतों को सुना और उनकी समस्याओं को हल किया। निजी तौर पर उनके साथ मेरा बहुत ही खूबसूरत रिश्ता था। मेरी संवेदना उनके परिवार और प्रियजनों के साथ हैं। ओम शांति।"पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज और भारतीय जनता पार्टी के सांसद गौतम गंभीर ने लिखा, "एक पिता आपको बोलना सिखाता है लेकिन एक पिता समान व्यक्ति आपको आवाज उठाना सिखाता है। एक पिता यू को चलना सिखाता है लेकिन एक पिता समान व्यक्ति आपको मार्च करना सिखाता है। एक पिता आपको एक नाम देता है, लेकिन एक पिता समान व्यक्तित्व आपको एक पहचान देता है। मेरे पिता समान श्री अरुण जेटली जी के साथ मेरा एक भी हिस्सा चला गया है। RIP सर।"विराट कोहली ने भारत के पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, "श्री अरुण जेटली जी के निधन के बारे में सुनकर काफी हैरान और दुखी हूँ। वह वास्तव में एक अच्छे इंसान थे, हमेशा दूसरों की मदद करने को तैयार रहते थे। 2006 में जब मेरे पिता जी का देहांत हुआ तो वो कीमती समय निकालकर मेरे घर आए, उनकी आत्मा को शांति मिले।"