खेल में भी हैं करियर के ऐसे शानदार मौके

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अभी तक खेल और नौकरी में बस यही संबंध हुआ करता था कि राज्य और केंद्र नौकरियों में स्पोर्ट्स कोटे से भी कुछ भर्तियां करते हैं, लेकिन अब इसके आगे भी बहुत कुछ है। दरअसल केंद्र सरकार के यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स द्वारा हालिया आयोजित 'खेलो इंडिया स्कीम' के फायदों ने खेलों की तरफ लोगों का आकर्षण और बढ़ा दिया है। इसकी वजह पिछले कुछ सालों से खिलाड़ियों के अच्छे प्रदर्शन से देश का नाम रौशन करना भी है। जिससे इस क्षेत्र में निवेश भी बढ़ा है।इस बारे में ग्रुप एम की ESP प्रॉपर्टी और स्पोर्ट्स पावर की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते एक वर्ष में देश में खेलों की स्पॉन्सरशिप में 14.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साल 2017 में खेलों में विज्ञापन पर 7,300 करोड़ रुपए खर्च हुए। वहीं 2016 में इस पर 6400 करोड़ खर्च हुए थे। इस कारण से खेलों में किस तरह के करियर विकल्प खुले हैं और इनके जरिए सरकारी नौकरी आप कैसे हासिल कर सकते हैं चलिए जानते हैं।

कॉर्पोरेट अपॉरच्युनिटीजः आज के वक्त में खेल क्लबों का तेजी से विकास हो रहा है। लोगों की इसमें रूचि बढ़ रही है। लिहाजा बड़ी कंपनियां भी इन क्लबों की तरफ रुख कर रही हैं। कंपनियां खेल क्लबों में खुद को ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए जुट रही हैं। ऐसे में भविष्य में उन्हें स्किल्ड मैनेजर की जरूरत पड़ेगी। यह सारा परिदृश्य संकेत दे रहा है कि बिजनस मैनेजमेंट के अंतर्गत जल्द ही स्पोर्ट्स मैनेजमेंट की स्ट्रीम भी सामने आएगी।स्पोर्ट्स में इस्तेमाल किए जाने वाले इक्विपमेंट्स/गुड्स को बनाने के लिए स्किल्ड और एक्सपीरियंस एक्सपर्ट की जरूरत होती है। कुछ कंपनियां जो स्पोर्ट्स इक्विपमेंट/गुड्स के प्रॉडक्शन का काम करती हैं, वहां खेलों के एक्सपर्ट्स की जरूरत होती है। स्टार्टअप इंडिया स्कीम के तहत अब ऐसे बहुत से स्टार्टअप्स हैं जो स्पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग का काम कर रहे हैं। इस फील्ड में भी रोजगार के बहुत से अवसर आने की उम्मीद है।जिन लोगों को खेल और लिखने में दिलचस्पी है लेकिन वह सीधे तौर पर खेलों में शामिल नहीं होना चाहते, ऐसे लोग स्पोर्ट्स राइटिंग में करियर बना सकते हैं। इसके लिए आप सीधे तौर पर अखबारों या मैग्जीन की तरफ रुख कर सकते हैं। आप चाहते हैं तो फ्रीलांस राइटिंग भी कर सकते हैं।

इधर कुछ सालों से हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रीशन और मेडिकल फील्ड में लोगों के बढ़ते रुझान को देखते हुए कंसल्टेंट्स की डिमांड बढ़ रही है। हेल्थ और फिटनेस बिजनसेज में स्कोप बढ़ रहा है। बहुत से पैरंट अपने बच्चों को अच्छा स्पोर्ट्समैन बनाने के लिए इंडिविजुअल फिटनेस प्रोग्राम अपना रहे हैं। इस तरह के प्रोग्राम भी खिलाड़ियों के लिए करियर के अच्छे ऑप्शन खोल रहे हैं।हर खेल में रेफरी या अम्पायर की जरूरत पड़ती है। जिस तरह अब अपने देश में खेलकूद को लेकर प्रयोग हो रहे हैं, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि जितनी ज्यादा प्रतियोगिताएं होंगी उतनी संख्या में रेफरी/अम्पायरों की जरूरत बढ़ेगी। हां, स्पोर्ट्स एडजूडिकेटर बनने के लिए खेल के नियमों की अच्छी जानकारी होनी जरूरी है।

आजकल खेलों में प्रशिक्षक के तौर पर भी करियर के लिए कई राहें हैं। वर्तमान में सरकार और भारतीय खेल प्राधिकरण की तरफ से खिलाड़ियों के लिए अच्छी स्कीम्स चलाई जा रही हैं। इसमें खिलाड़ियों को अच्छा प्रदर्शन करवाने के लिए बेहतरीन प्रशिक्षकों की जरूरत हो रही है। अच्छे स्कूल भी अपने यहां अच्छे मेंटॉर के लिए जगह निकाल रहे हैं। यही नहीं, आप खुद की कोचिंग भी खोल सकते हैं। बहुत सारे पैरंट अपने बच्चों को कोचिंग देने के लिए अच्छे ट्रेनर के पास उनका ऐडमिशन करवाते हैं। ऐसे में अगर आपको खेलों में इंट्रेस्ट है और आप खिलाड़ी हैं, तो मेंटॉर की तरह करियर बना सकते हैं।खेलों में सबसे अच्छा करियर फील्ड में स्पोर्ट्समैन का होता है। सिर्फ खेलते हुए ही नहीं बल्कि फील्ड के बाहर भी आपको खिलाड़ी होने भर से रोजगार के बेहतर मौके उपलब्ध हो सकते हैं। बतौर खिलाड़ी, आप खेल प्रतियोगिताओं में अच्छे प्रदर्शन से वाहवाही बटोरेंगे तो खेल में प्रदर्शन के साथ-साथ कमाने के जरिए भी बढ़ेंगे। एक्सपर्ट्स की मानें तो टीम गेम से ज्यादा इंडिविजुअल गेम्स में खिलाड़ियों का बेहतरीन प्रदर्शन उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका देते हैं।