लचर तैयारी! क्या टीम इंडिया जीत पाएगी 2019 विश्व कप?

07

क्रिकेट इतिहास में अब तक सिर्फ पांच बार हुआ कि कोई टीम शुरुआती 2 मैच जीतने के बाद सीरीज हारी हो। भले ही भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया के हाथों पांच मैच की सीरीज 3-2 से मात मिली हो, लेकिन उसको इन पांच मैच से बहुत कुछ सीखने को मिला होगा।अब जब वर्ल्ड कप शुरू होने में करीब 75 दिन बाकी हैं और 'क्रिकेट के महाकुंभ' से पहले भारतीय टीम की यह आखिरी सीरीज थी, तो ऐसे में उसके सामने टीम कॉम्बिनेशन तय करने का बेहतरीन मौका था, लेकिन अफसोस इस बात का है कि विराट कोहली पूरे सीरीज में प्रयोग ही करते रहे और अंत में निराशा हाथ लगी।

बेहद कमजोर मध्यक्रम

खास बात यह रही कि यह विराट की कप्तानी में भारतीय सरजमीं पर पहली वन-डे सीरीज हार थी। वैसे तो दिल्ली वन-डे के बाद विराट यह कहते दिखे कि टीम में बदलाव हार के लिए कोई बहाना नहीं। अगर इस हार का विश्लेषण किया जाए तो टीम का मध्यक्रम अभी तक नासूर बना हुआ है।सलामी बल्लेबाजी का मोर्चा रोहित शर्मा और शिखर धवन संभालेंगे। तीसरे क्रम पर खुद भारतीय कप्तान विराट कोहली आएंगे। इसके बाद क्या? धोनी को छोड़ने के बाद ऐसा कोई बल्लेबाज नजर नहीं आता जो पूरे 50 ओवर खेलने का माद्दा रखता हो। खासतौर पर चौथे क्रम के लिए अभी तक असमंजस की स्थिति बरकरार है। 2015 विश्व कप के बाद से टीम मैनेजमेंट ने इस क्रम पर 10 से ज्यादा बल्लेबाज आजमा लिए, लेकिन नतीजा 'निल बटे सन्नाटा' ही रहा।

खराब फॉर्म के बाद टीम से बाहर किए गए युवराज सिंह आजतक खुद को साबित नहीं कर पाए। सुरेश रैना को भी मौके दिए गए, लेकिन वे भी इस कमी को पूरी नहीं कर पाए। इसके बाद अलग-अलग समय पर मनीष पांडे, लोकेश राहुल, मनोज तिवारी और केदार जाधव को भी टीम ने ट्राई किया, लेकिन निराशा वहां भी मिली।

क्या रहाणे सिर्फ टेस्ट खिलाड़ी हैं?

नंबर 4 पर ऐसे बल्लेबाज की जरूरत होती है तो स्ट्राइक को रोटेट कर सके। विकेट गिरने पर 'अंगद' की तरह क्रीज पर पैर जमाकर खड़ा हो जाए। और जरूरत पड़ने पर बीच-बीच में चौके-छक्के भी लगाए।रहाणे इन सारे काम में निपुणे थे, लेकिन खराब फॉर्म के बाद उन्हें पहले टीम से बाहर किया गया। बाद में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद सिर्फ टेस्ट तक ही समेट कर रख दिया गया।रहाणे ने नंबर 4 पर 25 पारियां खेली हैं और करीब 37 की औसत से रन बनाए हैं। वहीं, मनीष पांडे को भी 4 नंबर पर बल्लेबाजी करने का मौका मिला, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में खेली उनकी शतकीय पारी को छोड़ दें तो वो छाप छोड़ने में असफल ही रहे।

आखिर कार्तिक और रायुडू के साथ क्या परेशानी है?

एमएस धोनी से भी पहले अपना वन-डे डेब्यू करने वाले दिनेश कार्तिक पूरे करियर में कभी एक नंबर पर बल्लेबाजी नहीं कर सके, उन्हें भी नंबर 4 पर आजमाया गया। डीके ने खुद को साबित भी किया। इस क्रम पर 39 की औसत से रन भी बनाए, लेकिन अचानक विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इसी वन-डे सीरीज में उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।IPL 2018 में मुंबई इंडियंस के लिए अंबाती रायुडू ने शानदार प्रदर्शन किया था। ईनाम के तौर पर हैदराबाद के इस खिलाड़ी को भारतीय टीम में जगह मिली। लगातार एक साल से रायुडू इस क्रम पर खेलते रहे। बीच-बीच में जरूर उन्होंने कुछ बढ़िया पारी खेली, जिसमें विपरित हालातों में न्यूजीलैंड में बनाए 90 रन भी आता है। मगर निरंतरता इस बल्लेबाज के खिलाफ जाती है।शायद रायुडू को विश्व कप टीम में शामिल भी किया जाए, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी मुकाबलों से बाहर करके टीम मैनेजमेंट ने यह भी बता दिया किअंंबाती अबतक पर पूरी तरह विश्वसनीय नहीं हो पाए हैं।

कम नहीं हो रहा विराट का सिरदर्द 

नंबर चार जरूर अब तक अबूझ पहेली है, लेकिन पांचवें नंबर पर धोनी का खेलना भी तय है। इसके बाद टीम के पास फिनिशर के तौर पर केदार जाधव, हार्दिक पांड्या और विजय शंकर जैसे विकल्प हैं।हाल के मुकाबलों में केदार 6 नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए कई अच्छी पारियां खेल चुके हैं। लगातार मिले मौकों को ऋषभ पंत भुनाने में नाकामयाब रहे। ऐसे में उनका विश्व कप में खेलना आईपीएल के प्रदर्शन पर भी काफी हद तक निर्भर करता है।चोटिल होकर ऑस्ट्रेलिया दौरे से बाहर हुए हार्दिक पांड्या भी अब फिट होकर आईपीएल की तैयारियों में जुट चुके हैं। विजय शंकर मौजूदा सीरीज की सबसे बड़ी खोज माने जा रहे हैं। इंग्लैंड के हालातों में टीम दो विशेषज्ञ तेज गेंदबाजों के साथ दोनों ऑलराउंडर को खिलाने के विकल्प पर भी गौर कर सकती है।सौ बात की एक बात कि इस फैले हुए रायते के लिए विराट कोहली और टीम मैनेजमेंट ही जिम्मेदार है। लगातार प्रयोग करना ही इस टीम पर भारी पड़ रहा है। अगर भारतीय कप्तान ने किसी एक खिलाड़ी पर भरोसा जताया होता तो शायद आज हालात कुछ और होते।