बीसीसीआई में परिवारवाद का बोलबाला

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नई दिल्ली: बीसीसीआई में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. लोढ़ा समिति की सिफारिशों को अमल में लाए जाने के बाद अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से पुराने चेहरों की विदाई हो गई है. अब  निरंजन शाह, अनुराग ठाकुर, अमित शाह. परिमल नाथवानी BCCI का हिस्सा नहीं है. BCCI के नए संविधान के मुताबिक अब इन लोगों द्वारा खाली किए गए पोस्ट पर चुनाव होगा. हालांकि चुनाव से पहले एक सवाल की वजह से फिर विवाद हो रहा है. विवाद BCCI में परिवारवाद को बढ़ावा देने को लेकर है. ऐसे में आइए जानते हैं किसका रिश्तेदार कौन से पद पर चुनाव में खड़ा है. 

BCCI और परिवारवाद

 इस बार गांगुली BCCI के नए अध्यक्ष हों सकते हैं. वहीं, दूसरी ओर अध्यक्ष पद की रेस में आगे माने जा रहे कर्नाटक के बृजेश पटेल आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालेंगे. सौरव गांगुली और बृजेश पटेल अलावा जय शाह बीसीसीआई के नए सचिव हो सकते हैं. हिमाचल प्रदेश के अरुण सिंह ठाकुर के कोषाध्यक्ष बनने की संभावना है. इन नामों में कई नाम ऐसे हैं जो परिवारवाद का उदाहरण है.राज्य इकाय पर परिवारवाद की बात करें तो पूर्व BCCI और अंतरराट्रीय परिषद के अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की बेटी रूपा गुरुनाथ इस वक्त तमिलनाडु क्रिकेट संघ की अध्यक्ष हैं. वहीं सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन में निरंजन शाह जो चार दशकों तक BCCI के सचिव रहे उनके पुत्र जयदेव शाह नए अध्यक्ष बने हैं. अब बात हिमाचल प्रदेश की करें तो वहां भी यही हाल है. हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोशिएन की बात करें तो वहां अनुराग ठाकुर के भाई अरुण अध्यक्ष हैं. केंद्रीय मंत्री और पूर्व गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह BCCI AGM के स्टेट के नॉमनी हैं. पूर्व राज्यसभा सांसद और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष परिमल नथवाणी के बेटे भी यहां पद पर हैं. वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन  के  उपाध्यक्ष हैं.इसको देखकर साफ पता लगता है कि अधिकांश क्रिकेट एसोसिएशन में परिवारवाद हावी है. अब एक बार फिर सूत्रों से मिली जानकारी से साफ है कि इस बार भी चुनाव में परिवारवाद हावी रहने वाला है. क्योंकि सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह बीसीसीआई के नए सचिव हो सकते हैं. हिमाचल प्रदेश के अरुण सिंह ठाकुर के कोषाध्यक्ष बनने की संभावना है. अरुण अनुराग ठाकुर के भाई हैं. इस तरह एक बार फिर बीसीसीआई के चुनाव में परिवारवाद देखने को मिल रहा है.