पांच खिलाड़ी, जो बन सकते हैं टीम इंडिया के ' फ्यूचर'

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अंडर-19 वर्ल्ड कप का खिताब इस बार टीम इंडिया अपने नाम नहीं कर पाई, लेकिन टीम के पांच ऐसे खिलाड़ी रहे, जो आने वाले समय में भारतीय सीनियर मेंस टीम का हिस्सा बन सकते हैं और देश को आईसीसी वर्ल्ड कप में रिप्रेजेंट कर सकते हैं। भारतीय टीम अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल तक अजेय रही और खिताबी मुकाबले में उन्हें बांग्लादेश के खिलाफ तीन विकेट से हार का सामना करना पड़ा। टीम के सलामी बल्लेबाज यशस्वी जयसवाल ने अपनी बल्लेबाजी से सबका दिल जीता, तो वहीं रवि बिश्नोई की स्पिन गेंदबाजी ने विरोधी बल्लेबाजों को खूब परेशान किया। इन पांच युवा खिलाड़ियों में 'फ्यूचर स्टार' की झलक दिखी है और ये आने वाले समय के विराट कोहली, रोहित शर्मा, भुवनेश्वर कुमार या कुलदीप यादव जैसे बड़े खिलाड़ी बन सकते हैं। यशस्वी जयसवाल को मैन ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया और उनकी बल्लेबाजी से हर कोई प्रभावित हुआ है। टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाला बल्लेबाज और सबसे ज्यादा विकेट लेने वाला गेंदबाज भारतीय टीम से ही है। यशस्वी ने सबसे ज्यादा रन बनाए, तो वहीं रवि बिश्नोई ने सबसे ज्यादा विकेट झटके।

यशस्वी जयसवालः जयसवाल ने अंडर-19 वर्ल्ड कप की छह पारियों में 59, नॉटआउट 29, नॉटआउट 57, 62, नॉटआउट 105 और 88 रन बनाए। इतना ही नहीं उन्होंने तीन विकेट भी लिए। फाइनल मैच में यशस्वी ने 88 रनों की पारी खेली और वो बेस्ट स्कोरर भी रहे। 6 पारियों में वो तीन बार नॉटआउट रहे। उन्होंने 133.33 की औसत और 82.47 के स्ट्राइक रेट से 400 रन बनाए। बल्लेबाजी के मामले में उनका वर्चस्व कुछ इस तरह रहा कि वो सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में उनके बाद दूसरे नंबर पर श्रीलंका के रविंदु रसंथा रहे, जिनके खाते में 286 रन थे। यशस्वी प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुने गए। यशस्वी की तुलना विराट कोहली से भी की जा रही है।

रवि बिश्नोईः जयसवाल अगर बल्लेबाजी में टीम इंडिया की रीढ़ रहे, तो गेंदबाजी में वही काम रवि बिश्नोई ने किया। अंडर-19 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को जब भी साझेदारी तोड़ने की जरूरत थी, तब रवि ने अपनी घूमती गेंद से टीम इंडिया को विकेट दिलाया। बिश्नोई ने टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 17 विकेट झटके। 6 मैच के दौरान उन्होंने कुल 52 ओवर की गेंदबाजी की और इस दौरान 10.64 की औसत और 18.3 के स्ट्राइक रेट ने उन्होंने 17 विकेट अपने नाम किए। रवि ने रन खर्चने में भी काफी कंजूसी की और 3.48 के इकॉनमी रेट से ही रन खर्चे। रवि की गेंद खेल पाना विरोधी बल्लेबाजों के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं नजर आ रहा था। तीन बार उन्होंने एक पारी में चार विकेट लिए। फाइनल मैच में भी उन्होंने चार विकेट झटके, बाकी गेंदबाजों से उनको वो सहयोग नहीं मिला, जिससे टीम इंडिया खिताब अपने नाम कर पाती।

कार्तिक त्यागीः तेज गेंदबाज कार्तिक के स्टैट्स भले ही इतने खतरनाक ना हों, लेकिन उनकी तेज गेंदबाजी जरूर खतरनाक नजर आई। वो गेंद को अच्छे से स्विंग भी करा लेते हैं और स्पीड के मामले में भी तेज हैं। कार्तिक ने 6 मैच में 44.2 ओवर की गेंदबाजी की और 3.45 के इकॉनमी रेट से 153 रन देकर कुल 11 विकेट अपने नाम किए। क्वॉर्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी गेंदबाजी के दम पर टीम इंडिया ने जीत दर्ज की थी। कार्तिक ने 13.90 की औसत और 24.1 के स्ट्राइक रेट से 11 विकेट झटके थे।

अथर्व अंकोलेकरः अंकोलेकर आने वाले समय में टीम इंडिया के लिए अहम ऑलराउंडर साबित हो सकते हैं। लोअर ऑर्डर में वो अपनी बल्लेबाजी से बैटिंग ऑर्डर को मजबूती देते हैं और इसके अलावा विकेट टेकर गेंदबाज भी हैं। अथर्व पिंच हिटर तो हैं ही, जरूरत पड़ने पर विकेट पर टिककर टीम को अच्छे स्कोर तक भी ले जा सकते हैं। इसके अलावा रनों पर अंकुश लगाने और साझेदारी तोड़ने की कला भी उन्हें अच्छे से आती है। क्वॉर्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनके नॉटआउट 55 रनों की बदौलत ही टीम इंडिया सम्मानजनक स्कोर तक पहुंच सकी थी। अंडर-19 वर्ल्ड कप से पहले ही अथर्व अपने खेल को लेकर चर्चा में आ चुके थे। 

दिव्यांश सक्सेनाः दिव्यांश ने जयसवाल के साथ मिलकर पारी का आगाज किया और टीम इंडिया को ज्यादातर मौकों को संभली हुई शुरुआत दी। दिव्यांश इसके अलावा अच्छे फील्डर भी हैं। दिव्यांश ने अंडर-19 वर्ल्ड कप में दो अर्धशतकीय पारियां खेलीं। 5 पारियों में दिव्यांश ने 50 की औसत से 150 रन बनाए, हालांकि उनका स्ट्राइक रेट 64.93 का रहा।